यादव सिंह प्रकरण: बिल्ड़रों तक पहुंचा सीबीआई जाँच का दायरा

नोएडा| नोएडा, नोएडा विकास प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे के चीफ इंजीनियर रही यादव सिंह की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है| इनके खिलाफ जाँच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की जांच का दायरा अब यादव सिंह के साथ-साथ बिल्ड़रों तक पहुँच गई है| सूत्रों की माने तो सीबीआई की जांच यादव सिंह और उनसे जुड़े लोगों के इर्दगिर्द घूम रही थी, लेकिन अब बिल्डरों के आवंटन की भी पड़ताल शुरू हो गई है। जांच एजेंसी एक दर्जन बिल्डरों को दिल्ली के सीजीओ कांपलेक्स स्थित दफ्तर में बुलाकर पूछताछ कर चुकी है। ज्यादातर वे बिल्डर हैं, जिन्हें 2002 से 2012 के बीच जमीन का आवंटन किया गया है। मंगलवार को भी कुछ बिल्डर सीबीआई दफ्तर में हाजिरी लगा चुके हैं। यह जांच नोएडा, ग्रेटर नोएडा के आवंटियों तक भी पहुंचने लगी है।

गौरतलब है कि 2002 से 2012 के बीच में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, मॉल, शिक्षण संस्थान और शॉपिंग कांपलेक्स बनाने केलिए भूखंडों का आवंटन हुआ है। नोएडा फेज तीन सेक्टर-71 से हिंडन किनारे तक में ज्यादातर बिल्डरों को इसी अवधि में जमीन दी गई है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी जमीनों का आवंटन इसी दौरान हुआ है। नोएडा के कुछ बिल्डरों को पूरे सेक्टर ही आवंटित कर दिए गए। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भी ज्यादातर आवंटन 2008 से 2010 के बीच हुए हैं। सीबीआई अब इन बिल्ड़रों के बारे में खोजबीन शुरू कर दी है जल्द ही पूछताछ के लिए बुला सकती है|

<a href = http://www.hindi.pardaphash.com/yadav-singh-investigation-grew-increasingly-difficult-to-influential-persons/#.Vih68NJ97IV>काली कमाई के धनकुबेर यादव सिंह के खिलाफ जांच तेज, रसूखदारों की बढ़ी मुश्किलें </a>

सीबीआई की अब तक की जांच से एक बात और सामने आई है। पार्क बनाने के लिए छोड़ी गई जमीन का लैंडयूज बदलकर आवंटित कर दिया गया। सेक्टर-127 सहित कई जगह ऐसे प्रकरण सामने आए हैं। सीबीआई अब इसकी भी जांच कर रही है कि किन मानकों के तहत पार्कों का लैंडयूज बदलकर कंक्रीट के जंगल बनाने की अनुमति दी गई।

इससे पहले सीबीआई ने यादव सिंह के साथ ही परिजनों के नाम पर दर्ज खेती की जमीन का भी ब्यौरा मांगा था। बताया जा रहा है कि सीबीआई की तरफ से रजिस्ट्री विभाग को पत्र मिला है। जिसमें यादव सिंह, उनकी पत्नी कुसुमलता, बेटा सनी यादव व दोनों बेटियों सहित अन्य परिजनों के नाम दर्ज जमीनों का ब्यौरा शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र में पर्थला खंजरपुर की जमीन का खासतौर पर जिक्र किया गया है।

सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह किसानों से कौड़ियों के भाव जमीन खरीदते थे। जिसे वह अपने रिश्तेदारों व करीबियों के नाम कराता था| इसके अलावा यादव सिंह से खरीदी गई जमीन प्राधिकरण भी अधिग्रहीत करता था। इसके बदले भारी-भरकम मुआवजा और पांच फीसदी आवासीय भूखंड मिल जाता था। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यादव सिंह ने जिन लोगों से संपत्ति खरीदी है और जिन लोगों को बेची है, दोनों ही सीबीआई के रडार पर हैं। पत्र मिलने के बाद रजिस्ट्री विभाग इसका पूरा ब्यौरा तैयार करने में जुट गया है। मालूम हो कि सीबीआई इससे पहले यादव सिंह, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर दर्ज आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रापर्टी का ब्यौरा ले चुकी है। इसके जरिये कई लोग जांच के दायरे में आ चुके हैं।