यूपी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए राहुल गांधी पहुंचे मथुरा, कहा पार्टी एक परिवार है

लखनऊ। यूपी कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी हैं, जिसके लिए पार्टी ने मथुरा में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सोमवार को एक दिवसीय चिंतन समारोह रखा। इस समारोह में पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मथुरा पहुंचे। जहां एक ओर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमेरिकी कंपनी एप्पल के दिवंगत सीईओ स्टीब्स जाॅब्स की कहानी सुनाई और कार्यकर्ताओं से नई रणनीति और एकजुटता के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।

राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि पहले वह पार्टी को सेना की तरह समझते थे, लेकिन अब वह पार्टी को परिवार के रूप में देखते हैं। सेना का जनरल जहां किसी भी सिपाही को निकालने की ताकत रखता है वहीं परिवार में किसी सदस्य को बाहर नहीं किया जा सकता। परिवार में कहना पड़ता है कि कोई काम किसी से नहीं हो पा रहा तो उसे दूसरा कर लेगा। परिवार के किसी भी सदस्य को किसी एक आदमी के चाहने की वजह से बाहर नहीं किया जा सकता। पार्टी तो उन लोगों को भी अपना ही मानती है जो लोगो अब पार्टी में नहीं हैं।

इसके बाद बीजेपी और आरएसएस पर विचारधारा को लेकर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस एक परिवार की तरह है और उस पर किसी एक व्यक्ति की विचारधारा को थोपा नहीं जा सकता। अगर यहां आरएसएस का कार्यक्रम होता और मोहन भागवत बोल रहे होते तो वह कहते कि असमान का रंग काला है तो सामने खड़े लोग भी कहते कि आसमान का रंग काला है। लेकिन कांग्रेस में ऐसा नहीं है यहां कई विचारधाराएं हैं, हो सकता है किसी के विचार दूसरे को अच्छे न लगें लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। कांग्रेस सबको साथ लेकर आगे बढ़ने वाली पार्टी है।

उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस यूपी में नंबर चार की पार्टी है, लेकिन विचारधारा के स्तर पर कांग्रेस नंबर एक है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वह निजी स्तर पर आपस में बातचीत करना शुरू करें, जिससे पार्टी की विचारधारा में एकरूपता आएगी। हमें हिन्दुस्तान के दिल में कांग्रेस की विचारधारा विकसित करनी होगी।

इसके बाद राहुल गांधी अपने चिर परिचित अंदाज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमलावर होते नजर आए। उन्होंने कहा कि सरकार बनने से पहले हर आदमी को 15 लाख रुपए दिए जाने की बात होती थी, रोजगार मिलने की बात होती थी ये सब कितने लोगों को मिला। अच्छे दिन कब आएंगे किसी भी युवा को रोजगार नहीं मिला।