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राजस्थान के बाद अब केरल में भी कांग्रेस के लिए मुसीबत, गुटबाजी से वरिष्ठ नेता परेशान

देश  में इन दिनों राजनीतिक उथल पुथल का दौर जारी है। कांग्रेस पार्टी को अस्थिरिता से जूझना पड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी लगातार गुटबाजी का शिकार  दिख रही है।

By अनूप कुमार 
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नई दिल्लीः देश  में इन दिनों राजनीतिक उथल पुथल का दौर जारी है। कांग्रेस पार्टी को अस्थिरिता से जूझना पड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी लगातार गुटबाजी का शिकार  दिख रही है। राजस्थान से लेकर पंजाब में कांग्रेस अपनी ही पार्टी के अंदर हो रही गुटबाजी से परेशान है। इन दोनों राज्यों में मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब केरल में भी कांग्रेस की मुसीबत बढ़ने वाली है। बताया जा रहा है कि केरल में पार्टी असंतोषकी स्थिति का सामना कर रही है। इसके पीछे केरल कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हाईकमान के ओर से लगातार नजरअंदाज किए जाने से असंतुष्ट है।

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बता दें कि राज्य में  हाल ही  में आये विधान सभा  चुनाव नतीजों में पार्टी की हार के बाद कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष ए. रामचंद्रन को पद से हटा दिया था। इसके अलावा विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला को भी हटाया गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा ने पिछले महीने केरल में सत्ता में वापसी की और कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।चेन्नीथला के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें सम्मानजनक एग्जिट के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का भी समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि नए राज्य इकाई प्रमुख के नाम और विपक्षी नेता की घोषणा से पहले उनसे सलाह तक नहीं ली गई थी। वीडी सतीसन नए विपक्षी नेता हैं, जबकि के सुधाकरन को केरल कांग्रेस का नया प्रमुख बनाया गया है।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केरल में संकट उतना बड़ा नहीं है, जितना चुनाव वाले राज्य पंजाब या राजस्थान में है. लेकिन वे मानते हैं कि चेन्नीथला, जो एक प्रमुख नेता हैं, शांत नहीं हुए तो केरल इकाई में गुटबाजी और भी गहरी हो सकती है। इस साल की शुरुआत में, केरल में कांग्रेस के एक नेता पीसी चाको ने गुटबाजी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी।

केरल में कांग्रेस पार्टी हमेशा से दो गुटों में बंटी रही है इनमें से एक गुट के करुणाकरण का है जबकि दूसरा गुट ए.के. एंटनी का है साल 2000 के बाद, करुणाकरण गुट का नेतृत्व चेन्निथला ने किया और एंटनी गुट का नेतृत्व दो बार पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने किया ये गुटबंदी आज भी जारी है।

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