राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए बनाए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग-2014 (एनजेएसी) के मामले पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच ने आयोग को असंवैधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। अदालत ने इस एनजेएसी पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि यह संशोधन के मूल ढ़ांचे को हिलाता है।

मिली जानकारी के मुताबिक अदालत ने 1993 में बने न्यायिक नियुक्ति के काॅलेजियम सिस्टम को सही मानते हुए कहा कि एनजेएसी के लागू होने से न्यायाधीशों की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ जाएगा, तथा इसके तहत चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनने वाले बुद्धजीवियों के पास एक तरह का बीटो पावर होगा।

मौजूदा काॅलेजियम सिस्टम के न्यायाधीशों की नियुक्ति देशभर के हाईकोर्टों के न्यायाधीशों के द्वारा भेजे गए न्यायाधीशों के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व चार अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों की सिफारिश पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की संतुति पर की जाती है। जिसमें बदलाव करते हुए 2014 में बनी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने संविधान संशोधन करते हुए एनजेएसी बनाते हुए काॅलेजियम के साथ तीन अन्य सदस्यों को भी प्रक्रिया में जोड़ दिया। जिसमें केन्द्रीय कानून मंत्री और संसद के नेता प्रतिपक्ष व नेता विपक्ष की ओर से चुने गए बुद्धजीवियों को भी शामिल किया जाएगा।

आपको बता दें कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की काॅलेजियम प्रक्रिया पर लंबे समय से सवाल उठते आए हैं। कई मौकों पर काॅलेजियम द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार के आरोपों लगने के बाद इस प्रक्रिया को बदलने की मांग भी उठ चुकी है। एनजेएसी के द्वारा केन्द्र सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने का प्रयास किया था। बताया जा रहा है कि अभी इस मामले पर अदालत फिर सुनवाई करेगी।