रिटायर्ड आईएएस अफसर को कैसे दे दी नियुक्ति

इलाहाबाद| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग के सचिव श्रीप्रकाश सिंह को काम करने से रोक दिया है तथा मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है कि सेवानिवृत्त पदेन सचिव, विशेष कार्याधिकारी को कैडर पद पर कैसे नियुक्ति किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्त अधिकारी की पुनर्नियुक्ति का अधिकार केन्द्र सरकार को है। राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है।

सिंह नगर विकास सचिव के अलावा नगरीय गरीबी उन्मूलन विभाग, सूडा के डायरेक्टर, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आदि कई विभागों के कार्य देख रहे हैं। आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन तथा न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र की खण्डपीठ ने बोधिसत्व समाज सेवा संस्थान की याचिका पर दिया। कोर्ट ने कहा कि श्रीप्रकाश सिंह की निश्चित अवधि के लिए विशेष कार्याधिकारी के रूप में नियुक्ति की गई। इसके बाद कार्यकाल बढ़ाया गया। ये पदेन सचिव नगर विकास भी थे।

31 जुलाई 2014 को सेवानिवृत्त होने के बाद नियुक्ति की गई। इनका कार्यकाल 29 फरवरी 16 तक बढ़ाया गया है। कोर्ट ने गाजियाबाद नगर निगम में अधिशासी अभियंता ट्रैफिक एके सिंह की लम्बे समय से तैनाती पर उन्हें हटाने की मांग पर मुख्य सचिव से कहा है कि वह निगमों में छह वर्ष से अधिक समय से तैनात अधिकारियों का तबादला कर 13 अक्टूबर को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें, साथ ही नगर निगमों व पालिकाओं का आडिट कराया जाए। कोर्ट ने आगरा, लखनऊ व कानपुर में लम्बे समय से कार्यरत अभियंताओं के भी तबादले का आदेश दिया है। याचिका पर सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव एसपी सिंह आईएएस थे। वह रिटायर हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें विभाग के प्रमुख सचिव पद का चार्ज दे दिया गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक नगर विकास मंत्री आजम खां का एसपी सिंह पर वरदहस्त है। राज्य में सपा की सरकार बनने के बाद जब आजम नगर विकास मंत्री बने तो एसपी सिंह को प्रमुख सचिव के पद पर बैठा दिया। आजम खां के सारे काम वही निपटाते हैं। एसपी सिंह के तार भी ऊपर तक हैं। यही वजह है कि उनकी गिनती भी बेअंदाज अफसरों में की जाती है।

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मार्च 2012 में आजम खां के मंत्री बनने के बाद से नगर विकास विभाग में दो बार प्रमुख सचिव पद के लिए आईएएस अधिकारियों की तैनाती हुई, लेकिन कोई भी आईएएस आजम खां के रवैये के कारण विभाग में नहीं टिका। यह भी बता जा रहा है कि पिछले साढ़े तीन सालों में नगर विकास विभाग में तैनात हुए दो प्रमुख सचिव केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा चुके हैं।

एसपी सिंह मूलत: पीसीएस सेवा के अधिकारी हैं। किसी जमाने में वह बसपा सरकार के सबसे ताकतवर अफसर पीएल पुनिया के खास हुआ करते थे। मगर 2005 में तत्कालीन सपा सरकार में आजम खां के उस समय करीब आए जब वह लखनऊ नगर निगम में नगर आयुक्त थे। एसपी सिंह की गिनती तेज तर्रार अफसरों में होती रही है।

इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से रिटायर्ड आईएएस श्रीप्रकाश सिंह को सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न विभागों के सचिव पद की नियुक्ति से हटाये जाने की मांग की थी| डॉ ठाकुर ने कहा था कि कागज़ पर सिंह विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) हैं पर वरिष्ठ मंत्री आज़म खान के दवाब में सभी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए उन्हें अल्पसंख्यक और नगर विकास विभाग के सचिव के साथ सुडा और उत्‍तर प्रदेश राज्‍य गंगा नदी संरक्षण प्राधि‍करण का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया है|

उन्होंने यह भी कहा था कि एक रिटायर अफसर होने के कारण सिंह पर अब कोई सेवा नियमावली लागू नहीं होती और उनकी कोई जिम्मेदारी भी नहीं तय की जा सकती| ऐसे में उन्हें जनता के सरोकारों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण पदों पर बैठने से लोकहित सीधे तौर पर प्रभावित होता है क्योंकि गलत ढंग से उपकृत होने के कारण सिंह जनता के प्रति नहीं, खान के प्रति विश्वासपात्र रहेंगे| अतः उन्होंने इसे आईएएस कैडर नियमावली के खिलाफ की गयी नियुक्ति बताते हुए प्रशासनिक उत्तरदायित्व के दृष्टिगत मुख्यमंत्री से इस गलत नियुक्ति को तत्काल रद्द करने की मांग की|