लेखकों द्वारा पुरस्कार वापस करना राजनीति से प्रेरित: रविशंकर प्रसाद  

नई दिल्ली। अभी तक जहां विपक्षी पार्टियां साहित्यकारों और लेखकों द्वारा पुरस्कार लौटाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधे हुए थे और पुसरकार वापस करने वाले लेखकों की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे। वहीं अब इस लेखकों को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लेखकों द्वारा पुरस्कार लौटाने की घटनाओं पर आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि अगर ये लेखक चुनाव हारने वाली पार्टी के समर्थन में खड़े हैं तो इनके विरोध को कांग्रेस प्रायोजित माना जाएगा।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम उनकी विद्वता का सम्मान करते हैं, लेकिन अगर वे चुनाव हार चुकी पार्टी के समर्थन में खड़े हैं, तो इससे यह बात और स्पष्ट हो जाएगी कि यह कांग्रेस प्रायोजित है। उन्होंने कहा कि ये सभी लेखक हमारे लिए माननीय हैं, लेकिन ये सभी नरेंद्र मोदी से नफरत करते रहे हैं। इनमें से कुछ को छोड़कर आप इनके 10 साल के इतिहास को उठाकर देख लीजिए। उनके संरक्षक आज हार चुके हैं, इसलिए ये नई राजनीति कर रहे हैं।

आपको बता दे कि कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या और दादरी कांड के विरोध में कई लेखकों ने अपना अवॉर्ड लौटा दिया है। अभी तक करीब 40 लेखक अपने पुरस्कार वापस कर चुके है। पुरस्कार वापस करने साहित्यकारों का कहना हैं कि अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले कलबुर्गी और दादरी हत्याकांड जैसी वारदातों से देश में असहनशीलता का माहौल फैला है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा सरकार कुछ नहीं कर रही है।

आपको बता दें कि इसके पहले केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी इसी मुद्दे पर इन लेखकों को आड़े हाथों ले चुके हैं। उन्होने लेखों के इस कृत्य को गढ़ी हुई बगावत बताया। उन्होने कहा कि ये जो गढ़ी हुई बगावत है, वह दरअसल ये भाजपा के प्रति वैचारिक असहनशीलता का मामला है। उन्होंने ये भी कहा कि पहले की सरकारों में संरक्षण का आनंद उठा रहे लोग मौजूदा सरकार से असहज हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। 

 

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