शत्रुघन सिन्हा की खिलाफत भाजपा के लिए चिंता का विषय  

पटना। बीते शुक्रवार को देश में बढ़ी दाल की कीमतों और शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रद्द हुई रैलियों को लेकर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर हमला बोलने वाले शत्रुघन सिन्हा ने जहां रविवार को एक और ट्विटर बम फोड़ा था वहीं सोमवार को उन्होने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाक़ात कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल रविवार को उन्होने ट्वीट करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को नसीहत दी कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान देना जरूरी है। वहीं सोमवार को पार्टी के विरोधी पार्टी कांग्रेस के प्रवक्ता से मुलाक़ात कर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरे ला दी।  

शत्रुघन सिन्हा ने रविवार को भाजपा द्वारा पांच सितारा होटल में प्रेसवार्ता करने को लेकर तंज कसते हुए अपने ट्वीट में कहा कि पांच सितारा होटलों में पत्रकार सम्मेलनों से अधिक जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की जरूरत है। उसके बाद सोमवार को उन्होने कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाक़ात कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। अपनी पार्टी के खास चेहरों में से एक शत्रुघन सिन्हा के इन हमलों से भाजपा खासा परेशान नजर आ रही है। हालांकि सुरजेवाला ने इस मुलाक़ात को एक सामान्य मुलाक़ात करार दिया है और शत्रुघन सिन्हा ने इसपर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को शत्रुघन सिन्हा ने दाल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर ट्वीट किया था कि दाल की कीमतें 200 रु पये तक पहुंच गयी है, सरकार को इसे कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। हमने पहले प्याज के आंसू देखे हैं, उसे नहीं भूलना चाहिए। वहीं शनिवार को उन्होने ट्विटर पर लिखा कि बिहार के कुछ स्थानीय तानाशाह नेताओं द्वारा गड़बड़ी फैलाने और अवांछनीय परिस्थिति के कारण भाजपा को अपने स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार रैलियों को अंतिम क्षणों में रद्द करना पड़ा। अंतिम क्षणों में ऐसा होने से राज्य की आम जनता में नकारात्मक संदेश जाता है।   

शत्रुघन सिन्हा के इस विरोधी रवैये ने भाजपा की परेशानियां तो बढ़ा ही दी हैं। साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल भी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों में इस बात को लेकर खास चर्चा सुनने को मिल रही हैं कि आखिर शत्रुघन सिन्हा की मंशा क्या है? क्या वह पार्टी छोड़ने वाले हैं या फिर उनकी यह करनी भाजपा की कोई रणनीति है। मालूम हो कि इसके पहले उन्होने सूबे ए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाक़ात की थी जिसकी भाजपा हाईकमान ने जमकर आलोचना की थी।    

 

 

 

 

 

 

 

 

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