समाजवादियों की सरकार में पुरस्कार लौटाने की नौबत नहीं आएगी: अखिलेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साहित्यकारों की ओर से पुरस्कार लौटाने के मुद्दे पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्य में समाजवादियों की सरकार है और इस सरकार में पुरस्कार लौटाने की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने अहम घोषणा की कि यश भारती सम्मान पाने वालों को अब राज्य सरकार 50 हजार रुपये की पेंशन देगी।

कैबिनेट की बैठक के बाद सीएम अखिलेश ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार उत्तर प्रदेश से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को राजपत्रित अधिकारी बनाने की शुरुआत करेगी। अखिलेश ने कहा, जहां तक पुरस्कार लौटाने का सवाल है तो समाजवादियों की सरकार में ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी। सरकार उत्तर प्रदेश में यश भारती सम्मान पाने वालों को 50 हजार रुपये पेंशन देगी। मुंबई में बीसीसीआई के कार्यालय पर शिवसेना कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

खेल के साथ राजनीति नहीं होनी चाहिए। देश में बिगड़ते माहौल के बारे में कहा कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि सोशल मीडिया को लेकर सतर्क रहें और इस तरह की चीजें सामने न आएं। वहीं, अखिलेश ने महंगाई मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान इन लोगों ने दावा किया था कि इनके पास महंगाई के निपटने का फार्मूला है, तो अब समय आ गया है कि ये लोग इस फार्मूला का इस्तेमाल करें।

उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र के पास कोई फार्मूला है तो सपा उसकी मदद करने को तैयार है लेकिन ‘‘उनका फार्मूला है क्या ?’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हमने मंडियों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने तथा आलू और दूध का उत्पादन बढाने का कार्य किया है। हम दालों का उत्पादन बढ़ाने के तौर तरीके भी निकालेंगे। अखिलेश ने कहा कि हमने गायों और भैंसों की संख्या में बढोतरी की है। लेकिन हम यदि गाय की बात करें तो वे :भाजपा: चर्चा को कहीं और ले जाते हैं। सांप्रदायिक घटनाओं में बढोतरी के मुद्दे पर अखिलेश ने कहा कि हर मुख्यमंत्री प्रयास कर रहा है कि उसके राज्य में निवेश आये।

भाजपा पर कड़ा रूख अपनाते हुए वह बोले, ‘‘उत्तर प्रदेश में सपा सरकार है। मान लीजिए कोई निवेशक आता है और कोई उसके चेहरे पर कालिख पोत देता है तो निवेशक वापस चला जाएगा। आप कैसा माहौल पैदा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि निवेश बढाने और बेरोजगारी को लेकर कोई बहस की बात ही नहीं है। महंगाई बढ़ी है और यदि इसी तरह बढ़ती रही तो उस पर काबू पाना मुश्किल होगा। गरीबी बढ़ी है। रचनात्मक बहस होनी चाहिए ताकि जनता को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पडे।