सीमैप को मिला ग्रामीण विकास पुरस्कार, प्रधानमंत्री करेंगे सम्मानित

लखनऊ। किसानो की आय में बढ़ोत्तरी के लिये  वेटिवर अथवा खस पर आधारित तकनीकी हस्तक्षेप हेतु सीएसआईआर ग्रामीण विकास पुरस्कार 2014 केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान सीमैप लखनऊ को चुना गया है। पुरुस्कार में 10 लाख रुपये की धनराशि सम्मान पत्र और शील्ड सम्मिलित हैं। यह पुरस्कार बाद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक समारोह में प्रदान किया जाएगा।

सीमैप के निदेशक प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया की खस की जड़ों से बहुमूल्य खस का तेल निकाला जाता है जिसका उपयोग सुगंधियों और स्वाद गंध में किया जाता है। दुनिया में प्रति वर्ष लगभग 600 से 700 टन खस के तेल का उत्पादन होता है। भारत में सालाना 20.25 टन खस का तेल पैदा किया जाता है जो अपने देश में सुगंध इत्र और साबुन उद्योग की मांग को देखते हुये बहुत कम है।

उन्होने बताया कि खस के तेल की बढ़ती मांग के अनुरूप खस की खेती में वृद्धि हुई है, किन्तु इसकी फसल में लगने वाले अधिक समय और कम उपज के कारण किसानो में इसकी खेती के प्रति आकर्षण में कमी देखी गई है।

प्रोफेसर ने बताया की सीएसआईआर-सीमैप के तकनीकी हस्तक्षेप द्वारा कम समय में पककर तैयार व अधिक उपज देने वाली (वार्षिक फसल-12 माह) को विकसित कर और उसके व्यापक प्रसार से किसानो को एक हेक्टेयर खेत से प्रति वर्ष 25 से 30 किलोग्राम तेल उत्पादित करने और लगभग एक लाख 50 हजार रुपये लाभ कमाने में मदद मिल सकी है। बाद में संस्थान के वैज्ञानिको द्वारा कुछ अन्य किस्मों का विकास कर उन्हे जारी किया गया है।

अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया की सीएसआईआर-सीमैप द्वारा खस के साथ प्रारम्भिक समय में गेहूं तथा  दूसरी सुगंधीय व औषधीय फसलों की सहफ़सली खेती करने की तकनीक भी विकसित की गई है ताकि किसानो को रुपये 30 हजार प्रति हेक्टेयर का अतिरिक्त लाभ मिल सके। प्रोफेसर त्रिपाठी ने आगे बताया कि सीमैप के लगातार किए गए प्रयासों से देश के विभिन्न राज्यों मे लगभग 50 हजार किसानों द्वारा खस की खेती करीब 22 हजार हेक्टेयर में की जा रही है।

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