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हरियाणा की इन 15 सीटों पर सभी निगाहें टिकीं, दिग्गजों की सांसे अटकी

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। हरियाणा की 90 विधानसभा के लिए मतगणना जारी है। सब लोगों की नजरें अंतिम परिणाम पर हैं। जहां एक तरफ एग्जिट पोल में भाजपा की स्पष्ट सरकार बनती दिख रही थी वहीं रूझाने के बाद ऐसा होता नहीं दिख रहा है। भाजपा के कई दिग्गज नेता और मंत्री पीछे चल रहे हैं। जजपा हरियाणा में नई किंगमेकर बनकर उभरी है। हम आपको बताते हैं हरियाणा की 10 सबसे वीआईपी सीटों पर कौन है भारी।

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1- बाढ़डा विधानसभा: बाढ़डा विधानसभा सीट पर इस बार देवीलाल और बंसीलाल के परिवार से प्रत्याशी आमने-सामने हैं। जजपा ने जहां नैना चौटाला को बाढ़डा से मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने बंसीलाल के बेटे एवं बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन रणबीर सिंह महेंद्रा पर दांव खेला है। महेंद्रा ने पिछला चुनाव भी बाढ़डा सीट से ही लड़ा था। वहीं, भाजपा ने सुखविंद्र मांढ़ी को लगातार दूसरी बार अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है।

2- सोनीपत विधानसभा- सोनीपत विधानसभा सीट पर भाजपा ने सरकार में अकेली महिला मंत्री कविता जैन को चुनाव में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने चंद महीने पहले ही पार्टी में आए सुरेंद्र पंवार को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर पिछले दो बार वर्ष 2009 व 2014 से लगातार कविता जैन जीत दर्ज कर रही थी। इसलिए उनके सामने इस सीट पर तीसरी बार जीत दर्ज करके हैट्रिक बनाने की चुनौती है।

3- महेंद्रगढ़ विधानसभा- राजस्थान बार्डर पर स्थित महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी रामबिलास शर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह सातवीं बार आमने-सामने हैं। दोनों के बीच छह बार हुए मुकाबले में दोनों तीन-तीन बार विधायक रह चुके हैं। वैसे महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से अब तक रामबिलास शर्मा पांच बार, जबकि राव दान सिंह तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। इस सीट पर हमेशा भाजपा व कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहता है। हालांकि पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में आकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

4- गढ़ी सांपला-किलोई : प्रदेश की सबसे हॉट सीट में से एक गढ़ी-सांपला-किलोई पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। खुद हुड्डा ने अपने पैतृक गांव सांघी में परिवार सहित वोट डाला। हुड्डा का गढ़ तोड़ने के लिए भाजपा ने इनेलो के जिला अध्यक्ष रहे सतीश नांदल को मैदान में उतारा है, जो कि पिछली बार हुड्डा से 47 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे। माना जा रहा है कि हलके में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर रही। जजपा, इनेलो व आप प्रत्याशियों का जोर नहीं दिखा।

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5- आदमपुर विधानसभा- आदमपुर में कुलदीप बिश्नोई अपना 52 साल पुराना गढ़ बचाने के लिए पिछले करीब छह माह से आदमपुर में परिवार सहित डेरा डाले हुए थे। वर्ष 1968 से यह सीट भजनलाल परिवार के पास है और यहां से भजनलाल परिवार के अलावा दूसरा कोई जीत हासिल नहीं कर सका है। छह माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में आदमपुर हलके से कुलदीप के बेटे भव्य बिश्नोई को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते कुलदीप अपना गढ़ बचाने के लिए हलके में लोकसभा चुनाव के बाद ही जम गए थे। दूसरी ओर उनके मुकाबले में भाजपा ने टिक-टॉक से मशहूर सोनाली फौगाट को मैदान में उतारा है। सोनाली फौगाट पहली बार चुनाव मैदान में हैं, जिस कारण उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

6- नारनौंद विधानसभा- नारनौंद की सीट इसलिए हॉट सीट है कि कैप्टन अभिमन्यु वहां से मैदान में हैं। मुख्यमंत्री के बाद सबसे दमदार वित्त मंत्रालय कैप्टन के पास ही था। उन्होंने हलके में काम भी कराए थे, लेकिन फिर भी अंतिम दो दिनों में भाजपा की हवा खराब होने और जजपा का ग्राफ बढ़ने से कैप्टन के पसीने छूटे हुए थे। कैप्टन के सामने जजपा के रामकुमार गौतम मैदान में हैं, जो पूर्व विधायक रह चुके हैं। गौतम 2005 में भाजपा की टिकट पर ही विधायक बने थे। आज वे जब चुनाव मैदान में उतरे उस समय उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए खुलकर मैदान में डटे रहे, जबकि कैप्टन को मतदाताओं को अपने कार्यों का हिसाब-किताब देना पड़ा।

7- टोहाना – भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला टोहाना विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर लड़े। इस बार उनकी नैया भंवर में फंसती नजर आ रही है। बराला यहां पर जजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह बबली के साथ नजदीकी मुकाबले में हैं। टोहाना विधानसभा क्षेत्र में कुल 220068 मतदाता हैं, जिनमें से 116062 पुरुष और 104006 महिला मतदाता हैं। टोहाना में इस बार बीजेपी प्रत्याशी सुभाष बराला से अधिक उनके भतीजों के व्यवहार के कारण मतदाता नाराज बताए गए।

8- ऐलनाबाद विधानसभा- इस बार ऐलनाबाद से कुल 13 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला इनेलो के अभय सिंह चौटाला और भाजपा के पवन बैनीवाल में देखने को मिला। दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया, क्योंकि पिछले चुनावों में भी दोनों आमने-सामने थे। उस समय इनेलो के अभय सिंह चौटाला करीब 11 हजार मतों से विजयी रहे थे। भाजपा के पवन बैनीवाल ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। इस बार ऐलनाबाद सीट पर शाम छह बजे तक 70 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि 2014 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 89 प्रतिशत मतदान हुआ था।

9- उचाना कलां विधानसभा- जींद जिले में सबसे अधिक हॉट सीट उचाना कलां की है। इस बार भी 2014 की तरह भाजपा उम्मीदवार प्रेमलता और जजपा उम्मीदवार दुष्यंत चौटाला के बीच मुकाबला है। 2014 में दुष्यंत चौटाला इनेलो पार्टी से उम्मीदवार थे, लेकिन इस बाद खुद की पार्टी जननायक जनता पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर मुख्य रूप से मुकाबला प्रेमलता और दुष्यंत चौटाला के बीच कांटे का मुकाबला है। 2014 में भाजपा की तरफ से प्रेमलता ने दुष्यंत को हरा कर जिले में कमल खिलाया था। पिछली बार इस सीट पर 85.2 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार शाम छह बजे 59.8 प्रतिशत ही मतदान हुआ।

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10- करनाल विधानसभा- प्रदेश के मुख्यमंत्री और करनाल से भाजपा के प्रत्याशी मनोहर लाल दोबारा से बड़ी जीत ओर बढ़ रहे हैं। सीएम मनोहर को आस है कि करनाल जीत का नया रिकॉर्ड कायम करेगी। बता दें कि पिछली बार मनोहर लाल ने पूर्व मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को 63773 हजार वोटों से पराजित किया था। करनाल से सीएम के मुकाबले कांग्रेस ने पूर्व विधायक सुमिता सिंह को न उतार कर त्रिलोचन सिंह को मैदान में उतारा, वे पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, इनेलो ने कोई प्रत्याशी करनाल से नहीं उतारा, जेजेपी ने बीएसएफ से बर्खास्त तेज बहादुर को प्रत्याशी बनाया, लेकिन पहले वह यूपी में गिरफ्तार हो गए और करनाल में प्रचार नहीं कर पाए।

11- दादरी- दादरी विधानसभा सीट से कांग्रेस ने पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सिंह को मैदान में उतारा था तो भाजपा ने राजनीति के अखाड़े में पहली बार उतरीं दंगल गर्ल बबीता फौगाट को चुनावी दंगल में प्रत्याशी के तौर पर उतारा। टिकट न मिलने पर कांग्रेस से बागी हुए पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान को जजपा ने प्रत्याशी बनाया था। वहीं, भाजपा से टिकट कटने के बाद सोमबीर सांगवान दादरी हलके से निर्दलीय चुनाव लड़े। दादरी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। 2014 के चुनाव में भाजपा को यहां से शिकस्त झेलनी पड़ी थी और उस समय भाजपा के प्रत्याशी सोमबीर सांगवान ही थे।

12-रेवाड़ी विधानसभा- टिकट वितरण के समय से ही रेवाड़ी सीट हॉट बनी हुई है। तमाम अड़चनों के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह अपने समर्थक सुनील यादव को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व सीएम तक की रेवाड़ी विधानसभा में रैली कराई गई। हालांकि कांग्रेस ने रेवाड़ी सीट पर लगातार 6 बार विधायक रहे कैप्टन अजय यादव के बेटे चिरंजीव राव को प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को कड़ा बना दिया। वहीं, भाजपा के बागी विधायक और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे रणधीर सिंह कापड़ीवास कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवार को कड़ी टक्कर देते दिखे।

13- बरोदा विधानसभा- बरोदा विधानसभा सीट पर वर्ष 2009 में कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा ने जीत दर्ज की। वहीं वर्ष 2014 में जब प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी, तब भी कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा का बरोदा पर कब्जा कायम रहा। इस बार भाजपा ने बरोदा सीट को कांग्रेस से छीनने के लिए बड़ा दांव योगेश्वर दत्त पर खेला था। क्योंकि बरोदा जाट बहुल क्षेत्र होने के कारण सभी प्रमुख पार्टियां वहां से जाट प्रत्याशी मैदान में उतारती हैं और कांग्रेस के अलावा इनेलो ने जोगेंद्र मलिक तो जजपा ने भूपेंद्र मलिक को मैदान में उतारा। जहां इस बार चुनाव पूरी तरह त्रिकोणीय हो गया और योगेश्वर दत्त, श्रीकृष्ण हुड्डा व भूपेंद्र मलिक के बीच टक्कर दिख रही है।

14- बादली विधानसभा- कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के फिर चुनाव मैदान में उतरने से बादली विधानसभा सीट प्रदेश की हॉट सीटों में एक है। भाजपा उम्मीदवार ओपी धनखड़ 2014 में यहां से विधायक चुने गए थे। करीब 11 हजार वोट से उन्होंने निर्दलीय कुलदीप वत्स पर जीत दर्ज की थी। कुलदीप वत्स को इस बार कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। मुकाबला यहां पर पहले आमने-सामने का लग रहा था, लेकिन जजपा के संजय कबलाना ने सभी समीकरण बिगाड़ कर मुकाबला को तिकोना कर दिया। 2014 में यहां पर 71.4 प्रतिशत मतदान हुआ था, तो वहीं इस बार यहां 60 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है।

15- तोशाम विधानसभा- भिवानी जिले की हॉट सीट कहे जाने वाली तोशाम सीट पर इस बार 70.4 फीसदी मतदान हुआ। हालांकि 2014 के विधानसभा चुनाव में यहां 82.2 फीसदी मतदान हुआ था। यहां मुख्य रूप से मुकाबला कांग्रेस की पूर्व मंत्री किरण चौधरी और भाजपा प्रत्याशी शशि रंजन परमार के बीच रहा। पूर्व मंत्री किरण चौधरी यहां पिछले तीन विधानसभा चुनावों से जीतती आ रही हैं, जबकि पूर्व विधायक शशि रंजन तोशाम वासियों के लिए नया चेहरा थे। ऐसे में अब मतदान में आई कमी किसके लिए नुकसानदायक और किसके लिए फायदेमंद होगी यह तो मतगणना के दिन ही पता चला पाएगा। यहां लोगों का कहना है कि मतदाता खामोश थे। तोशाम सीट जहां चौ. बंसीलाल परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल है, वहीं इस बार भाजपा ने भी इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा से गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी जनसभाएं कर भाजपा के लिए वोट मांगे।

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