हिंसा का रास्ता छोड़ कलम उठाया तो नक्सलियों ने गोलियों से भूना

रांची| पाकिस्तान के मलाला युसुफजई के साथ जो घटना हुई उसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया| दुनिया भर के लोगों की दुवाओं ने उसे तो जिंदगी दे दी लेकिन भारत की संगीता उर्फ गुड्डी इतनी खुशकिस्मत नहीं रहीं| हिंसा का रास्ता छोड़ जब उसने कलम अपने अपने हाथ मे ली तब ये बात नक्सलियों को पसंद नहीं आई और उसे गोलियों से भून डाला|

संगीता जब 11 साल की थी तभी नक्सलियों ने उज्जवल भविष्य का सपना दिखा कर उसे अपने साथ कर लिया| संगीता नक्सलियों के साथ हो ली| पढ़ने-लिखने,खेलने-कूदने की उम्र में संगीता को पहाड़ों, जंगलों में जीवन बिताना पड़ा| साथ ही नक्सलियों ने किये तमाम काम करने पड़ते| जैसे तैसे आठ साल गुजर गए| संगीता जैसे-जैसे बड़ी हो रही थी,उसके ख्याल भी नए रंग भरने लगे| उसे अब अपना जीवन व्यर्थ लगने लगा वो भी पढ़ना-लिखना चाहती थी| इसलिए उसने नक्सलियों का साथ छोड़ने का फैसला कर लिया|

20 साल की उम्र में उसने नक्सलियों का साथ छोड़ दिया और गुमला चली आई| यहाँ आकर उसने एक स्कूल में अपना दाखिला कर लिया| एक अंग्रेजी अखबार में दिए इंटरव्यू में संगीता ने बताया कि वो नक्सलियों के आगे नहीं झुकेगी| वह पढ़ना चाहती है और अपनी इस ख्वाहिश को जरूर पूरा करेगी| उसने रिपोर्टर से आग्रह किया की उसकी कहानी पेपर में न छापी जाये| नक्सलियों को उसके बारे में जानकारी मिल सकती है| उसने कहा कि जब तक नक्सली उसके बारे में पता नहीं कर लेते तब तक आराम से वो अपनी जिंदगी गुजार सकती है और पढ़ाई भी कर सकती है|

पिछले मंगलवार को अपने परिवारवालों से मिलने के लिए संगीता सिबली गयी थी| वहीँ से नक्सलियों ने संगीता का अपहरण कर लिया| बाद में उसका शव गोलियों से छलनी पाया गया|

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