सुप्रीम कोर्ट से शिक्षामित्रों को राहत, सशर्त मिलेगी नौकरी

लखनऊ। यूपी के 1.72 लाख शिक्षाम़ित्रों के बतौर प्राइमरी शिक्षक नियमित समायोजन पर सुप्रीम कोर्ट का राहत भरा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा कि शिक्षामित्रों के अध्यापन के अनुभव को देखते हुए उनके समायोजन को अनुचित करार नहीं दिया जा सकता, लेकिन शिक्षण के लिए आवश्यक योग्यता के लिए उन्हें स्नातक की डिग्री पेश करने के साथ ही टीईटी परीक्षा भी पास करने पड़ेगी। अदालत ने शिक्षामित्रों को टीईटी पास करने के दो अवसर प्रदान किए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षामित्रों की ओर से लखनऊ हाईकोर्ट द्वारा उनके समायोजन पर 2015 में लगाई गई रोक के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय से अपने भविष्य को लेकर अदालत से विचार करने को कहा। शिक्षामित्रों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि 1.72 लाख शिक्षामित्र लंबे समय से यह काम कर रहे हैं। बतौर शिक्षक उनके समायोजन न किए जाने से उनका भविष्य अधर में लटक जाएगा।

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इस याचिका पर सुनवाई करने के बाद अदालत ने शिक्षामित्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कहा कि जो शिक्षामित्र अपने शैक्षिणिक रिकार्ड देने के साथ—साथ दो वर्षों में टीईटी परीक्षा पास करने में सफल रहते हैं, उन्हें उनके अनुभव को ध्यान में रखकर समायोजित किया जाएगा। इसमें ध्यान रखने वाली बात यह होगी कि सभी को टीईटी की परीक्षा पास करने के केवल दो मौके ही मिलेंगे।

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लखनऊ। यूपी के 1.72 लाख शिक्षाम़ित्रों के बतौर प्राइमरी शिक्षक नियमित समायोजन पर सुप्रीम कोर्ट का राहत भरा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा कि शिक्षामित्रों के अध्यापन के अनुभव को देखते हुए उनके समायोजन को अनुचित करार नहीं दिया जा सकता, लेकिन शिक्षण के लिए आवश्यक योग्यता के लिए उन्हें स्नातक की डिग्री पेश करने के साथ ही टीईटी परीक्षा भी पास करने पड़ेगी। अदालत ने शिक्षामित्रों को…
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