वाणिज्य कर विभाग में 10 करोड़ का घोटाला, दोषी नाजिर आकाश कपूर को बचाने में जुटे अधिकारी

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वाणिज्य कर विभाग में 10 करोड़ का घोटाला, दोषी नाजिर आकाश कपूर को बचाने में जुटे अधिकारी

लखनऊ। वाणिज्य कर के जिला मुख्यालय में बिल्डिंग और बिजली से सम्बंधित मरम्मत कार्यो मे लगभग 10 करोड़ के घोटाले की पुष्टि हुई है। जांच अधिकारी द्वारा घोटाले की पुष्टि के बाद वाणिज्य कर के ही डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह इस घोटाले को दबाने मे लगे है। इस 10 करोड़ के घोटाले का सबसे बड़ा आरोप जिला मुख्यालय में नाजिर पद पर कार्यरत आकाश कपूर के ऊपर लगा है। खास बात यह है कि आकाश कपूर द्वारा किये गये 10 करोड़ के घोटाले को दबाने मे डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह सहित विभाग के कई अधिकारी लग गये है।

10 Crore Scam In The Commerce Tax Department Officials Trying To Save The Guilty Nazir Akash Kapoor :

बता दें कि वाणिज्य कर विभाग के जिला मुख्यालय में बिल्डिंग और बिजली से सम्बन्धित मरम्मत कार्यो में लगभग 10 करोड़ के घोटाले की कई कर्मचारी संगठन द्वारा मुख्यमन्त्री से शिकायत की गयी थी। जिसकी जांच ज्वाइंट कमिश्नर संजीव कुमार सिंह द्वारा की गई। जांच अधिकारी ज्वाइंट कमिश्नर ने नाजिर आकाश कपूर को दोषी मानते हुए इसे पटल से हटाने की सिफारिश की थी। मगर नाजिर आकाश कपूर को पटल से हटाने की बात तो छोड़िये डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह ने आकाश कपूर को क्लीन चिट देते हुये जांच अधिकारी ज्वाइंट कमिश्नर संजीव कुमार सिंह की जांच रिर्पोट को सिरे से खारिज कर दिया।

इसके साथ ही साथ डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा नाजिर आकाश कपूर के समर्थन मे खुलकर आना इस बात की ओर इशारा करता है कि इस मामले मे आकाश कपूर सहित कई और दोषियों को बचाया जा रहा है।
वाणिज्य कर विभाग के कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा आकाश कपूर को बचाना उनकी मजबूरी है। इन कर्मचारियों ने बताया कि अगर डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह आकाश कपूर को न बचायें तो इस मामले मे वह खुद फंस सकते है। कर्मचारियों ने बताया कि इस 10 करोड़ के घोटाले की कायदे से जांच हो जाये तो कई और बड़े अधिकारियों के नाम सामने आ जायेंगे। कर्मचारियों ने बताया कि जिला मुख्यालय के पांचवी मंजिल को दो बार कागजों में काम दिखाकर पैसा हड़पा गया है।

इस मामले मे ज्वाइंट कमिश्नर संजीव सिंह द्वारा जब नाजिर को दोषी माना गया है और नाजिर आकाश कपूर के विरूद्ध कार्यवाही की बात कही गयी। ऐसे में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा आकाश कपूर को बचाने के मामले की शिकायत भी मुख्यमन्त्री से हो चुकी है। मुख्यमन्त्री से शिकायत में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह और नाजिर आकाश कपूर को तत्काल निलम्बन करते हुये विभाग मे हुये 10 करोड़ के रिकवरी की बात भी कही गयी है।
ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) संजीव कुमार सिंह ने अपनी जांच रिर्पोट मे कहा है कि कार्यालय में तैनात नाजिर आकाश कपूर से जब इस मामले की फाइल मांगी गई तो उन्होंने इसे देने में टालमटोल का रवैया अपनाया।

नाजिर का जवाब था कि पूर्व में तैनात लेखाकार के सेवानिवृत्त होने से फाइल मिल नहीं रही है। इस बहानेबाजी से घोटाला होने की पुष्टि होती है। ऐसे में नाजिर आकाश कपूर को अनियमितता का दोषी पाते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए। ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) संजीव कुमार सिंह ने अपनी जांच रिर्पोट मे नाजिर आकाश कपूर को तत्काल पटल से हटाये जाने की बात भी कही है। वहीं इस मामले मे नाजिर आकाश कपूर ने कहा कि मेरे ऊपर लगाये गये सारे आरोप गलत है।

इस मामले में वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसा कोई पैसा हमारे पास आया ही नहीं है। जिस अधिकारी ने आरोप लगाए थे, उसने भी अपनी गलती मान ली है। जब पैसा ही नहीेें आया तो घोटाला कैसे हो सकता है।

लखनऊ। वाणिज्य कर के जिला मुख्यालय में बिल्डिंग और बिजली से सम्बंधित मरम्मत कार्यो मे लगभग 10 करोड़ के घोटाले की पुष्टि हुई है। जांच अधिकारी द्वारा घोटाले की पुष्टि के बाद वाणिज्य कर के ही डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह इस घोटाले को दबाने मे लगे है। इस 10 करोड़ के घोटाले का सबसे बड़ा आरोप जिला मुख्यालय में नाजिर पद पर कार्यरत आकाश कपूर के ऊपर लगा है। खास बात यह है कि आकाश कपूर द्वारा किये गये 10 करोड़ के घोटाले को दबाने मे डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह सहित विभाग के कई अधिकारी लग गये है। बता दें कि वाणिज्य कर विभाग के जिला मुख्यालय में बिल्डिंग और बिजली से सम्बन्धित मरम्मत कार्यो में लगभग 10 करोड़ के घोटाले की कई कर्मचारी संगठन द्वारा मुख्यमन्त्री से शिकायत की गयी थी। जिसकी जांच ज्वाइंट कमिश्नर संजीव कुमार सिंह द्वारा की गई। जांच अधिकारी ज्वाइंट कमिश्नर ने नाजिर आकाश कपूर को दोषी मानते हुए इसे पटल से हटाने की सिफारिश की थी। मगर नाजिर आकाश कपूर को पटल से हटाने की बात तो छोड़िये डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह ने आकाश कपूर को क्लीन चिट देते हुये जांच अधिकारी ज्वाइंट कमिश्नर संजीव कुमार सिंह की जांच रिर्पोट को सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही साथ डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा नाजिर आकाश कपूर के समर्थन मे खुलकर आना इस बात की ओर इशारा करता है कि इस मामले मे आकाश कपूर सहित कई और दोषियों को बचाया जा रहा है। वाणिज्य कर विभाग के कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा आकाश कपूर को बचाना उनकी मजबूरी है। इन कर्मचारियों ने बताया कि अगर डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह आकाश कपूर को न बचायें तो इस मामले मे वह खुद फंस सकते है। कर्मचारियों ने बताया कि इस 10 करोड़ के घोटाले की कायदे से जांच हो जाये तो कई और बड़े अधिकारियों के नाम सामने आ जायेंगे। कर्मचारियों ने बताया कि जिला मुख्यालय के पांचवी मंजिल को दो बार कागजों में काम दिखाकर पैसा हड़पा गया है। इस मामले मे ज्वाइंट कमिश्नर संजीव सिंह द्वारा जब नाजिर को दोषी माना गया है और नाजिर आकाश कपूर के विरूद्ध कार्यवाही की बात कही गयी। ऐसे में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह द्वारा आकाश कपूर को बचाने के मामले की शिकायत भी मुख्यमन्त्री से हो चुकी है। मुख्यमन्त्री से शिकायत में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह और नाजिर आकाश कपूर को तत्काल निलम्बन करते हुये विभाग मे हुये 10 करोड़ के रिकवरी की बात भी कही गयी है। ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) संजीव कुमार सिंह ने अपनी जांच रिर्पोट मे कहा है कि कार्यालय में तैनात नाजिर आकाश कपूर से जब इस मामले की फाइल मांगी गई तो उन्होंने इसे देने में टालमटोल का रवैया अपनाया। नाजिर का जवाब था कि पूर्व में तैनात लेखाकार के सेवानिवृत्त होने से फाइल मिल नहीं रही है। इस बहानेबाजी से घोटाला होने की पुष्टि होती है। ऐसे में नाजिर आकाश कपूर को अनियमितता का दोषी पाते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए। ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) संजीव कुमार सिंह ने अपनी जांच रिर्पोट मे नाजिर आकाश कपूर को तत्काल पटल से हटाये जाने की बात भी कही है। वहीं इस मामले मे नाजिर आकाश कपूर ने कहा कि मेरे ऊपर लगाये गये सारे आरोप गलत है। इस मामले में वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर प्रशासन शक्ति प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसा कोई पैसा हमारे पास आया ही नहीं है। जिस अधिकारी ने आरोप लगाए थे, उसने भी अपनी गलती मान ली है। जब पैसा ही नहीेें आया तो घोटाला कैसे हो सकता है।