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हर कदम पर किसानों के साथ मोदी सरकार, पीएम फसल बीमा योजना के तहत 10 राज्यों को दिए 1,008 करोड़

1008 Crore Given To 10 States Under Pm Crop Insurance Scheme Modi Government With Farmers At Every Step

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर वर्ग के लोगों को राहत देने के कार्य में जुटी है। पिछले 15-20 दिनों में केंद्र सरकार ने किसानों को हर तरह की मदद देने का कार्य किया है। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब तक 10 राज्यों के किसानों को 1,008 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया है। इस बीच केंद्र सरकार की यह कोशिश भी जारी है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ें। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने बीमा कंपनियों के सामने कई तरह की शर्तें रख दी हैं, ताकि किसानों का हित सुरक्षित रहे। इसके तहत बीमा का अधिकांश प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर देती हैं। किसानों को खरीफ फसलों पर कुल प्रीमियम का 2 फीसदी, रबी फसलों पर 1.5 और बागवानी नकदी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी प्रीमियम देना होता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक लोग इस योजना का फायदा उठाएं।

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4.91 करोड़ किसानों के खातों में जमा कराए सम्मान निधि के 9,826 करोड़ रुपये
कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई की अगुवाई कर रहे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर वर्ग, हर समुदाय की मदद करने में भी जुटे हैं। मोदी सरकार ने कोरोना संकट के दौरान लोगों की मदद के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का ऐलान किया है। जिसके तक महिलाओं, मजदूरों, किसानों, गरीबों को आर्थिक मदद दी जा रही है। इसी बीच मोदी सरकार ने पीएम-किसान सम्मान निधि की पहली किस्त के 2000 रुपये लाभार्थी किसानों के खातों में जमा कर दिए हैं।

कृषि मंत्रालय के मुताबिक लॉकडाउन के बीच में ही केंद्र सरकार ने 4.91 करोड़ किसानों के बैंक खातों में राशि डालने के लिए 9,826 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए हैं और ये रकम उनके खातों में जमा भी करा दी गई है। जाहिर है कि केंद्र सरकार द्वारा हर साल इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों के खातें में तीन किश्तों में 6000 रुपये की राशि जमा की जाती है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत अब तक 9 करोड़ किसान रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इसमें से फिलहाल 4.91 करोड़ किसानों के खाते में यह राशि डाली जा रही है। यह राशि 24 मार्च 2020 से लेकर 3 अप्रैल 2020 जारी की गई है।

कोरोना संकट के बीच किसानों को मोदी सरकार की बड़ी राहत
कोरोना महामारी से निपटने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 21 दिनों को लॉकडाउन किया है। जाहिर है कि इससे हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों पर असर पड़ रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पिछले दस दिनों से लगातार हर क्षेत्र के लिए राहत पैकेज और सहूलियतों का ऐलान कर रही है। अब मोदी सरकार ने 7 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसान परिवारों को बड़ी राहत दी है। मोदी सरकार ने इन किसानों को राहत देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए कर्ज के भुगतान की डेट दो महीने बढ़ा दी है। बैंकों से लिए गए सभी अल्पकालिक फसली ऋण के भुगतान की अंतिम तारीख 31 मार्च से बढ़ाकर अब 31 मई कर दी गई है। अब किसान 31 मई तक अपने फसल ऋण को केवल 4 प्रतिशत प्रति वर्ष के पुराने रेट पर ही भुगतान कर सकते हैं। बता दें अगर किसान 31 मार्च या फिर समय पर इस कर्ज का बैंक को भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें 7 फीसदी ब्याज देना होता है।

जाहिर है कि खेती के लिए केसीसी पर लिए गए तीन लाख रुपये तक के लोन की ब्याजदर वैसे तो 9 फीसदी है, लेकिन मोदी सरकार इसमें 2 परसेंट की सब्सिडी देती है। यानी किसानों को 7 फीसदी ब्याज ही देना पड़ता है। अगर किसान समय पर कर्ज लौटा देता है तो उसे 3 फीसदी की और छूट मिल जाती है। इस तरह इसकी दर जिम्मेदार किसानों के लिए मात्र 4 फीसदी रह जाती है। इससे पहले सरकार ने कृषि से जुड़ी गतिविधियों को भी लॉकडाउन से अलग रखने का फैसला किया था। इसके तहत कृषि उत्पादों की खरीद, मंडियों, उर्वरकों की दुकानों, किसानों व कृषि श्रमिकों द्वारा खेत में किए जाने वाले कार्यों आदि में छूट दी गई है। फसल कटाई व बुआई और बागवानी में काम आने वाले यंत्रों की अंतरराज्यीय आवाजाही को भी छूट दी गई है।

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गृह मंत्रालय के अनुसार 21 दिनों के लॉकडाउन के संबंध में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कृषि व सम्बंधित वस्तुओं, सेवाओं और क्रियाकलापों को आवश्यक छूट देते हुए अतिरिक्त श्रेणियों में रखा गया है। इससे फसलों की कटाई में भी बाधा नहीं आएगी।

गृह मंत्रालय के अनुसार:
1. कृषि उत्पादों की खरीद से संबंधित संस्थाओं व न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित कार्यों,
2. कृषि उत्पाद बाजार कमेटी व राज्य सरकारों द्वारा संचालित मंडियों,
3. उर्वरकों की दुकानों, किसानों व कृषि श्रमिकों द्वारा खेत में किए जाने वाले कार्यों, कृषि उपकरणों हेतु कस्टम हायरिंग केंद्रों (सीएचसी) और
4. उर्वरक, कीटनाशक व बीजों की निर्माण व पैकेजिंग इकाइयों, फसल कटाई व बुआई से संबंधित कृषि व बाग़वानी में काम आने वाले यंत्रों की अंतरराज्य आवाजाही को भी छूट दी गई है।

यह निर्णय कृषि से संबंधित कार्यों के, बिना किसी व्यवधान के समय पर होने के संबंध में लिए गए हैं, जिससे कि इस विकट समय में लॉकडाउन के दौरान भी देश की जनता को खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा सके और किसानों व आम जनता को कोई परेशानी नहीं आएं।

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