ईशा योग केंद्र में स्थापित आदियोगी की 112 फीट ऊंची प्रतिमा अतुल्य भारत के गंतव्यों में शामिल

ईशा योग केंद्र , आदियोगी की 112 फीट ऊंची प्रतिमा
ईशा योग केंद्र में स्थापित आदियोगी की 112 फीट ऊंची प्रतिमा अतुल्य भारत के गंतव्यों में शामिल

केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय ने कोयंबटूर में ईशा योग केंद्र में स्थापित आदियोगी – योग के मूलदाता – भगवान शिव की 112 फीट ऊंची भव्य मूर्ति को ‘अतुल्य भारत’ की सूची में शामिल कर लिया है।आदियोगी की मूर्ति की डिजाइन और प्राण प्रतिष्ठा ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्‌गुरु द्वारा की गई है। पिछले वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदियोगी की प्रतिमा का अनावरण किया था।

112 Feet Face Of Adiyogi At Isha Yoga Center Is Now An Incredible India Destination :

इस मौके पर सद्‌गुरु ने कहा, ‘आदियोगी का भव्‍य चेहरा अपने आस-पास स्थिरता के साथ—साथ उल्लास और मदहोशी फैलाता है। अब आदियोगी अतुल्य भारत अभियान का एक हिस्सा हैं। जिन लोगों ने इसे मूर्त रूप दिया है, उन सभी को बधाई।’

ईशा फाउंडेशन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सद्‌गुरु ने ढाई सालों में आदियोगी के चेहरे का डिजाइन तैयार किया था, जिसे मूर्त रूप प्रदान करने के लिए ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवकों की टीम ने आठ महीने महनत की थी। मई 2017 में, इस प्रतिमा को आदियोगी को धरती पर विशालतम अर्ध-प्रतिमा के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया।

सद्‌गुरु ने आदियोगी का महत्व बताते हुए कहा, ‘यह बहुत जरूरी है कि इस धरती पर आने वाली अगली पीढ़ी जिज्ञासु हो, किसी मत व संप्रदाय में विश्‍वास करने वाली नहीं। जब आने वाले दशकों में तर्क और वैज्ञानिक प्रमाण की कसौटी पर पूरे न उतरने वाले सिद्धांत, विचारचाराएं और मत प्रणालियां ध्वस्त हो जाएंगी, तो स्वाभाविक रूप से लोगों में मुक्ति की चाह बढ़ेगी। उस चाह के बढ़ने के बाद, आदियोगी और योग का विज्ञान बहुत महत्वपूर्ण हो जाएगा।’

योगिक परंपरा में आदियोगी को योग का मूलदाता माना जाता है। करीब 15,000 साल पहले, सभी धर्मों के आने से पहले वह पहले योगी थे, जिन्होंने अपने सात शिष्यों, सप्तऋषियों को योग विज्ञान में दीक्षित किया। उन्होंने 112 तरीके बताए, जिनसे इंसान अपनी सीमाओं को पार करके अपनी परम प्रकृति को पा सकता है।

आदियोगी का भव्‍य चेहरा इस तरह बनाया गया है कि उसके रखरखाव की जरूरत बहुत कम है। आदियोगी के निर्माण का मकसद कोई स्मारक बनाना नहीं था, बल्कि उसे योग विज्ञान के जरिये आत्म-रूपांतरण की ओर ले जाने वाली प्रेरक शक्ति के रूप में बनाया गया है।

आदियोगी के गौरवशाली चेहरे के साथ एक प्रतिष्ठित ऊर्जा रूप योगेश्वर लिंग स्थापित है जिसकी प्राण प्रतिष्ठा सद्गुरु ने महाशिवरात्रि 2017 से ठीक पहले की थी। योगेश्वर लिंग का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा पूजा के लिए नहीं, साधना के लिए की गई है। आदियोगी की भव्य मूर्ति के सामने दस लाख से अधिक लोग आराम से बैठकर ध्यान कर सकते हैं। जिस स्थान पर आदियोगी की स्थापना की गई है, वह साधकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि वह 11 डिग्री अक्षांश पर स्थित है, जो आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए बहुत मददगार होता है।

सद्‌गुरु परिचय

भारत के पचास सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूचि में शामिल सद्‌गुरु, एक योगी, रहस्यदर्शी, युगदृष्टा और ख्याति प्राप्त लेखक हैं। 2017 में भारत सरकार ने अनूठी सेवा के लिए हर साल दिए जाने वाले देश के उच्चतम नागरिक पुरस्कार, पद्मविभूषण, से सद्गुरु को सम्मानित किया।

ईशा योग केंद्र के बारे में

वेल्लिंगिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित ईशा योग केंद्र, ईशा फाउंडेशन का मुख्यालय है। ईशा योग केंद्र आत्म-रूपांतरण के लिए एक पवित्र स्थल है, जहां पर अपने भीतरी विकास के लिए समय बिताया जा सकता है। ईशा योग केंद्र का मुख्य आकर्षण ऊर्जा का शक्तिशाली और अनूठा रूप ध्यानलिंग है, जो हर मनुष्य के लिए जीवन को संपूर्णता में अनुभव करने की संभावना प्रस्तुत करता है। ईशा योग केंद्र का माहौल स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने में मददगार है।

केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय ने कोयंबटूर में ईशा योग केंद्र में स्थापित आदियोगी – योग के मूलदाता – भगवान शिव की 112 फीट ऊंची भव्य मूर्ति को ‘अतुल्य भारत’ की सूची में शामिल कर लिया है।आदियोगी की मूर्ति की डिजाइन और प्राण प्रतिष्ठा ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्‌गुरु द्वारा की गई है। पिछले वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदियोगी की प्रतिमा का अनावरण किया था।इस मौके पर सद्‌गुरु ने कहा, ‘आदियोगी का भव्‍य चेहरा अपने आस-पास स्थिरता के साथ—साथ उल्लास और मदहोशी फैलाता है। अब आदियोगी अतुल्य भारत अभियान का एक हिस्सा हैं। जिन लोगों ने इसे मूर्त रूप दिया है, उन सभी को बधाई।’ईशा फाउंडेशन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सद्‌गुरु ने ढाई सालों में आदियोगी के चेहरे का डिजाइन तैयार किया था, जिसे मूर्त रूप प्रदान करने के लिए ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवकों की टीम ने आठ महीने महनत की थी। मई 2017 में, इस प्रतिमा को आदियोगी को धरती पर विशालतम अर्ध-प्रतिमा के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया।सद्‌गुरु ने आदियोगी का महत्व बताते हुए कहा, ‘यह बहुत जरूरी है कि इस धरती पर आने वाली अगली पीढ़ी जिज्ञासु हो, किसी मत व संप्रदाय में विश्‍वास करने वाली नहीं। जब आने वाले दशकों में तर्क और वैज्ञानिक प्रमाण की कसौटी पर पूरे न उतरने वाले सिद्धांत, विचारचाराएं और मत प्रणालियां ध्वस्त हो जाएंगी, तो स्वाभाविक रूप से लोगों में मुक्ति की चाह बढ़ेगी। उस चाह के बढ़ने के बाद, आदियोगी और योग का विज्ञान बहुत महत्वपूर्ण हो जाएगा।’योगिक परंपरा में आदियोगी को योग का मूलदाता माना जाता है। करीब 15,000 साल पहले, सभी धर्मों के आने से पहले वह पहले योगी थे, जिन्होंने अपने सात शिष्यों, सप्तऋषियों को योग विज्ञान में दीक्षित किया। उन्होंने 112 तरीके बताए, जिनसे इंसान अपनी सीमाओं को पार करके अपनी परम प्रकृति को पा सकता है।आदियोगी का भव्‍य चेहरा इस तरह बनाया गया है कि उसके रखरखाव की जरूरत बहुत कम है। आदियोगी के निर्माण का मकसद कोई स्मारक बनाना नहीं था, बल्कि उसे योग विज्ञान के जरिये आत्म-रूपांतरण की ओर ले जाने वाली प्रेरक शक्ति के रूप में बनाया गया है।आदियोगी के गौरवशाली चेहरे के साथ एक प्रतिष्ठित ऊर्जा रूप योगेश्वर लिंग स्थापित है जिसकी प्राण प्रतिष्ठा सद्गुरु ने महाशिवरात्रि 2017 से ठीक पहले की थी। योगेश्वर लिंग का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा पूजा के लिए नहीं, साधना के लिए की गई है। आदियोगी की भव्य मूर्ति के सामने दस लाख से अधिक लोग आराम से बैठकर ध्यान कर सकते हैं। जिस स्थान पर आदियोगी की स्थापना की गई है, वह साधकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि वह 11 डिग्री अक्षांश पर स्थित है, जो आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए बहुत मददगार होता है।सद्‌गुरु परिचयभारत के पचास सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूचि में शामिल सद्‌गुरु, एक योगी, रहस्यदर्शी, युगदृष्टा और ख्याति प्राप्त लेखक हैं। 2017 में भारत सरकार ने अनूठी सेवा के लिए हर साल दिए जाने वाले देश के उच्चतम नागरिक पुरस्कार, पद्मविभूषण, से सद्गुरु को सम्मानित किया। ईशा योग केंद्र के बारे मेंवेल्लिंगिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित ईशा योग केंद्र, ईशा फाउंडेशन का मुख्यालय है। ईशा योग केंद्र आत्म-रूपांतरण के लिए एक पवित्र स्थल है, जहां पर अपने भीतरी विकास के लिए समय बिताया जा सकता है। ईशा योग केंद्र का मुख्य आकर्षण ऊर्जा का शक्तिशाली और अनूठा रूप ध्यानलिंग है, जो हर मनुष्य के लिए जीवन को संपूर्णता में अनुभव करने की संभावना प्रस्तुत करता है। ईशा योग केंद्र का माहौल स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने में मददगार है।