गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में 2017 में हुई 1250 मौतें

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में 2017 में हुई 1250 मौतें

लखनऊ। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चों की मौत के लिए बदनाम हो चुके इस मेडिकल कालेज में 27, 28, 29 अगस्त को 78 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जिनमें 7 बच्चे इंसेफेलाइटिस के मरीज थे जबकि 71 नवजात थे जिनका इलाज एनआईसीयू और पीआईसीयू में चल रहा था।

जनवरी से लेकर अगस्त 2017 तक बीआरडी मेडिकल कालेज 1250 मौतों का गवाह बन चुका है। इनमें सर्वाधिक 290 मौतें केवल अगस्त के महीने में हुयी हैं। अस्पताल के प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इन मौतों में अधिकांश बच्चे इंसेफेलाइटिस के मरीज थे या फिर नवजात वार्ड के एनआईसीयू में भर्ती करवाए गए थे।

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एक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में 152, फरवरी में 122, मार्च मेंं 159, अप्रैल में 123, मई में 139, जून में 137 और जुलाई में 128 मौतें हुई हैं। जिनमें अगस्त में हुई 290 मौतों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 1250 का हो जाता है।

बीआरडी मेडिकल कालेज के नवनियुक्त प्रिंसिपल डॉ0  पीके सिंह का कहना है कि अगस्त में हुई 290 मौतों में 77 मामले इंसेफेलाइटिस के है जबकि 213 बच्चे एनआईसीयू में भर्ती थे। मेडिकल कालेज में भर्ती करवाए गए बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि कई ने तो दो से तीन घंटे के इलाज के बाद ही दम तोड़ दिया।

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प्रिंसिपल का कहना है कि आस पास के सात से आठ जिलों में बीआरडी मेडिकल कालेज बच्चों की स्पेशियलिटी वाला एक मात्र अस्पताल है। जहां बिहार और नेपाल से भी बच्चे आते हैं। मृत बच्चों में अधिकांश ऐसे थे जो प्रीमैच्योर बर्थ के बाद अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती करवाए गए थे। जिनमें निमोनिया, कुपोषण, पीलिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के अलावा इंसेफलाइटिस के लक्षण भी थे। आम तौर पर बीआरडी तक आने वाले मरीज बेहद गंभीर अवस्था में लाए जाते हैं। जिस वजह से कई मामलों में इलाज के दौरान बच्चों की मौत हो जाती है।

प्रिंसिपल का कहना है कि बच्चों की मौत बेहद कष्टदायी है। इनमें से कई ऐसे थे जिन्हें बचाया जा सकता था, लेकिन ऐसा तभी संभव था जब​ उन्हें समय रहते यहां भर्ती करवाया जाता।

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