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भ्रष्टाचार के आरोपियों की ‘दुश्मन’ बनी मोदी सरकार, 15 अफसरों को जबरन किया रिटायर

15 Very Senior Cbic Officers Compulsorily Retires By Modi Government

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सख्त फैसलों का दौर शुरू हो गया है। सरकार ने एक्साइज और कस्टम डिपार्टमेंट के 15 वरिष्ठ अधिकारियों को समय से पहले रिटायर कर दिया है।पिछले हफ्ते आयकर विभाग के 12 वरिष्ठ अफसरों को वित्त मंत्रालय ने जबरन रिटायर (Compulsory Retirement) कर दिया था।

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डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत वित्त मंत्रालय ने इन अफसरों को समय से पहले ही रिटायरमेंट दे दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इससे पहले भी इसी महीने की शुरुआत में भ्रष्टाचार और पेशेवर कदाचार के आरोप में आयकर विभाग के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया था।

इसके पहले भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही सख्त फैसला लिया था। पिछले हफ्ते टैक्स विभाग के ही 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायर (Compulsory Retirement) कर दिया गया था। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत वित्त मंत्रालय के इन अफसरों को सरकार समय से पहले ही रिटायरमेंट दे रही है। इस तरह अब तक कुल 27 अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया गया है।

पिछले हफ्ते नियम 56 के तहत रिटायर किए गए सभी अधिकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई अफसरों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार, अवैध और बेहिसाब संपत्ति के अलावा यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप थे।

क्या है नियम 56?

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दरअसल, रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है। सरकार के जरिए अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने का नियम काफी पहले से ही प्रभावी है।

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