इन्वेस्टर्स समिट में सजावट के नाम पर भी हुआ था 1.83 करोड़ का घोटाला

investers summit 2018
इन्वेस्टर्स समिट में सजावट के नाम पर भी हुआ था 1.83 करोड़ का घोटाला

लखनऊ। प्रदेश को विकास की नई राह पर ले जाने के लिए हुई इन्वेस्टर समिट में हर कदम पर घोटाले हुए ​थे। एलईडी स्ट्रिप, खाने और अन्य कामों के साथ ही सजावट में भी करोड़ों रूपए का हेर—फेर हुआ था। आलम ये रहा कि जो काम कार 65 लाख रूपए में होना था ​उसके लिए 2.48 करोड़ रूपए के बिल लगाए गए। इसकी भनक लगते ही कृषि उत्पादन आयुक्त ने पूरे मामले की जांच की तो मामला सहीं पाया गया। जिसके में उन्होने संबंधित उप निदेशक उघान, निरीक्षक व लेखाकार को निलंबित कर एफआईआर कराने की सिफारिश करते हुए 86 लाख रूपए वसूलने की बात मुख्यमंत्री से की है। इतना ही नहीं बचे हुए 96 लाख रूपए का भुगतान पर रोंक लगाने की सिफारिश की है।

2 48 Crore Fraud In Investers Summit On Flower Decoration :

ये घोटाला फूलों की सजावट में किया गया है। आयोजन स्थल व मार्गों की सजावट कराने की जिम्मेदारी उघान विभाग को सौंपी गई थी। कार्यक्रम के बाद शिकायत आई कि फूलों की सजावट में बड़ा खेल हुआ है। तब एपीसी डॉ. प्रभात कुमार ने समिति बनाकर मामले की जांच कराई तो तो पूरा मामला खुल कर सामने आ गया।

बता दें कि जांच में पता चला कि ज्यादातर कोटेशन फर्जी पाए गए थे। जो फर्में बंद है या फिर जो हैं ही नहीं, उनके नाम पर मनमाने दर से कोटेशन लगाए गए। सूत्रों का कहना है कि इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में 80 हजार गमले लगाने की बात कहीं गई थी, लेकिन जांच की गई तो पता चला कि वहां इतने गमले लग ही नहीं सकते।

हर स्तर पर जमकर हुई धनउगाही

बता दें कि इन्वेस्टर समिट में व्यवस्थाओं के नाम पर हर स्तर पर जमकर धन की उगाही की गई है। बताया जा रहा है कि आलमबाग राजकीय उघान के धर्मपाल यादव ने अधिकार न होने के बावजूद भी 1.52 करोड़ रूपए का भुगतान कर दिया और 96.1 लाख रूपए बकाया बताया। वहीं फर्मों द्वारा आपूर्ति न होने के बावजूद भी प्रभारी उघान अधिकारी संजय राठी ने बाउचर के माध्यम से 1.03 लाख का भुगतान खुद को ​कर लिया। जिसके बाद मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजते हुए संख्त कार्रवाई की मांग की है।

रंगाई व ढुलाई के नाम पर भी किया गया फर्जी भुगतान

बता दें कि इन्वेस्टर ​समिट सजावट के नाम पर हुए घोटाले की जांच में ही पता चला कि गमलों की रंगाई व ढुलाई के नाम पर भी 19 लाख रूपए का फर्जी भुगतान किया गया है। इसी तरह 188 रूपए का एक गमला दिखाकर 9.18 लाख पौधों का कई गुना ज्यादा मूल्य दिखाकर 54.56 लाख रूपए का फर्जी भुगतान किया गया।

लखनऊ। प्रदेश को विकास की नई राह पर ले जाने के लिए हुई इन्वेस्टर समिट में हर कदम पर घोटाले हुए ​थे। एलईडी स्ट्रिप, खाने और अन्य कामों के साथ ही सजावट में भी करोड़ों रूपए का हेर—फेर हुआ था। आलम ये रहा कि जो काम कार 65 लाख रूपए में होना था ​उसके लिए 2.48 करोड़ रूपए के बिल लगाए गए। इसकी भनक लगते ही कृषि उत्पादन आयुक्त ने पूरे मामले की जांच की तो मामला सहीं पाया गया। जिसके में उन्होने संबंधित उप निदेशक उघान, निरीक्षक व लेखाकार को निलंबित कर एफआईआर कराने की सिफारिश करते हुए 86 लाख रूपए वसूलने की बात मुख्यमंत्री से की है। इतना ही नहीं बचे हुए 96 लाख रूपए का भुगतान पर रोंक लगाने की सिफारिश की है।ये घोटाला फूलों की सजावट में किया गया है। आयोजन स्थल व मार्गों की सजावट कराने की जिम्मेदारी उघान विभाग को सौंपी गई थी। कार्यक्रम के बाद शिकायत आई कि फूलों की सजावट में बड़ा खेल हुआ है। तब एपीसी डॉ. प्रभात कुमार ने समिति बनाकर मामले की जांच कराई तो तो पूरा मामला खुल कर सामने आ गया।बता दें कि जांच में पता चला कि ज्यादातर कोटेशन फर्जी पाए गए थे। जो फर्में बंद है या फिर जो हैं ही नहीं, उनके नाम पर मनमाने दर से कोटेशन लगाए गए। सूत्रों का कहना है कि इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में 80 हजार गमले लगाने की बात कहीं गई थी, लेकिन जांच की गई तो पता चला कि वहां इतने गमले लग ही नहीं सकते।

हर स्तर पर जमकर हुई धनउगाही

बता दें कि इन्वेस्टर समिट में व्यवस्थाओं के नाम पर हर स्तर पर जमकर धन की उगाही की गई है। बताया जा रहा है कि आलमबाग राजकीय उघान के धर्मपाल यादव ने अधिकार न होने के बावजूद भी 1.52 करोड़ रूपए का भुगतान कर दिया और 96.1 लाख रूपए बकाया बताया। वहीं फर्मों द्वारा आपूर्ति न होने के बावजूद भी प्रभारी उघान अधिकारी संजय राठी ने बाउचर के माध्यम से 1.03 लाख का भुगतान खुद को ​कर लिया। जिसके बाद मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजते हुए संख्त कार्रवाई की मांग की है।

रंगाई व ढुलाई के नाम पर भी किया गया फर्जी भुगतान

बता दें कि इन्वेस्टर ​समिट सजावट के नाम पर हुए घोटाले की जांच में ही पता चला कि गमलों की रंगाई व ढुलाई के नाम पर भी 19 लाख रूपए का फर्जी भुगतान किया गया है। इसी तरह 188 रूपए का एक गमला दिखाकर 9.18 लाख पौधों का कई गुना ज्यादा मूल्य दिखाकर 54.56 लाख रूपए का फर्जी भुगतान किया गया।