लापरवाही : वॉटर ट्रीटमेंट के नाम पर रोजाना नाले में बहाया जा रहा दो करोड़ लीटर गंगाजल

raw water treatment plant
लापरवाही : वॉटर ट्रीटमेंट के नाम पर रोजाना नाले में बहाया जा रहा दो करोड़ लीटर गंगाजल

कानपुर। कानपुर जलकल विभाग की करतूतों के चलते करीब दो करोड़ लीटर गंगाजल नाले में बहाया जा रहा है। सीसामऊ नाले को बंद करने के दौरान जल निगम को जब इसकी जानकारी हुई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बताया जा रहा है कि कानपुर जलकल अपने मुख्य रॉ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से इतनी भारी मात्रा में गंगाजल नाले में बहा रहा है। ये स्थिती तब है ​जब प्लांटों से निकलने वाले 5 प्रतिशत वेस्ट वॉटर को री-साइकल किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि कानपुर के काफी पुराने प्लांट में बर्बादी 10 प्रतिशत से ज्यादा होगी।

2 Million Liter Gangajal Drain Flown In Kanpur :

बता दें कि कई दिनों से जल निगम गंगा में गिरने वाले सीसामऊ नाले को डायवर्ट कराने का काम करवा रहा था। मंगलवार और बुधवार को मोटर चलाकर बचा हुआ करीब 50-60 एमएलडी सीवेज जाजमऊ की तरफ पंप किया गया। इस काम में लगी मोटर की क्षमता 26 एमएलडी पानी पंप करने की है, लेकिन पानी करीब 78 एमएलडी के स्तर पर था।

जांच-पड़ताल में पता चला कि जलकल के बेनाझाबर रॉ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का पानी सीसामऊ नाले में मिल रहा है। भैंरोघाट पर लगी मोटर गंगा से पानी खींचकर इस प्लांट में पहुंचाती है। जल निगम के जीएम आरके अग्रवाल का कहना है कि हर दिन 15-20 एमएलडी यानी डेढ़ से दो करोड़ लीटर नाले में जा रहा है। इस बारे में जलकल ने बताया कि फिल्टर्स और सेटलिंग टैंक की सफाई की जा रही है। इसके बाद पानी रुकवा जल निगम ने सिस्टम फिर जांचा। इसके पहले भी लाइन में कई दिनों से लगातार मटमैला पानी बह रहा था।

बता दें कि बेनाझाबर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 250 एमएलडी पानी साफ करने की है। मानकों के मुताबिक इस प्रक्रिया में करीब पांच प्रतिशत पानी बर्बाद होता है। चूंकि ये प्लांट काफी पुराना और हाथ से चलने वाला है,जिसके चलते इसमें के अनुसार, 5 प्रतिशत पानी पूरी प्रक्रिया में बर्बाद होता है। यह प्लांट काफी पुराना और हाथ से चलने वाला है। ऐसे में बर्बादी 10 प्रतिशत से ज्यादा होने की आशंका है। मतलब रोजाना 2.5 करोड़ लीटर पानी (25 एमएलडी) गंगाजल नाले में बहाया जा रहा है। इसके अलावा हर 24-36 घंटे में फिल्टर भी साफ किए जाते हैं, जिनमें कहीं ज्यादा पानी लगता है।

इस मामले का खुलासा होने के बाद जलकल के ​जीएम संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि फिल्टर और सेटलिंग टैंक की सफाई के कारण ऐसा हुआ। हमारे प्लांट में वेस्टेज सिर्फ 5 प्रतिशत है। आगे से ऐसा हुआ तो जल निगम को बताएंगे। वहीं जलनिगम के जीएम आरके अग्रवाल का कहना है कि थोड़ा पानी पंप करने में कोई दिक्कत नहीं है। कई बार जाजमऊ पर जरूरत से ज्यादा सीवेज पहुंच चुका है।

कानपुर। कानपुर जलकल विभाग की करतूतों के चलते करीब दो करोड़ लीटर गंगाजल नाले में बहाया जा रहा है। सीसामऊ नाले को बंद करने के दौरान जल निगम को जब इसकी जानकारी हुई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बताया जा रहा है कि कानपुर जलकल अपने मुख्य रॉ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से इतनी भारी मात्रा में गंगाजल नाले में बहा रहा है। ये स्थिती तब है ​जब प्लांटों से निकलने वाले 5 प्रतिशत वेस्ट वॉटर को री-साइकल किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि कानपुर के काफी पुराने प्लांट में बर्बादी 10 प्रतिशत से ज्यादा होगी। बता दें कि कई दिनों से जल निगम गंगा में गिरने वाले सीसामऊ नाले को डायवर्ट कराने का काम करवा रहा था। मंगलवार और बुधवार को मोटर चलाकर बचा हुआ करीब 50-60 एमएलडी सीवेज जाजमऊ की तरफ पंप किया गया। इस काम में लगी मोटर की क्षमता 26 एमएलडी पानी पंप करने की है, लेकिन पानी करीब 78 एमएलडी के स्तर पर था। जांच-पड़ताल में पता चला कि जलकल के बेनाझाबर रॉ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का पानी सीसामऊ नाले में मिल रहा है। भैंरोघाट पर लगी मोटर गंगा से पानी खींचकर इस प्लांट में पहुंचाती है। जल निगम के जीएम आरके अग्रवाल का कहना है कि हर दिन 15-20 एमएलडी यानी डेढ़ से दो करोड़ लीटर नाले में जा रहा है। इस बारे में जलकल ने बताया कि फिल्टर्स और सेटलिंग टैंक की सफाई की जा रही है। इसके बाद पानी रुकवा जल निगम ने सिस्टम फिर जांचा। इसके पहले भी लाइन में कई दिनों से लगातार मटमैला पानी बह रहा था। बता दें कि बेनाझाबर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 250 एमएलडी पानी साफ करने की है। मानकों के मुताबिक इस प्रक्रिया में करीब पांच प्रतिशत पानी बर्बाद होता है। चूंकि ये प्लांट काफी पुराना और हाथ से चलने वाला है,जिसके चलते इसमें के अनुसार, 5 प्रतिशत पानी पूरी प्रक्रिया में बर्बाद होता है। यह प्लांट काफी पुराना और हाथ से चलने वाला है। ऐसे में बर्बादी 10 प्रतिशत से ज्यादा होने की आशंका है। मतलब रोजाना 2.5 करोड़ लीटर पानी (25 एमएलडी) गंगाजल नाले में बहाया जा रहा है। इसके अलावा हर 24-36 घंटे में फिल्टर भी साफ किए जाते हैं, जिनमें कहीं ज्यादा पानी लगता है। इस मामले का खुलासा होने के बाद जलकल के ​जीएम संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि फिल्टर और सेटलिंग टैंक की सफाई के कारण ऐसा हुआ। हमारे प्लांट में वेस्टेज सिर्फ 5 प्रतिशत है। आगे से ऐसा हुआ तो जल निगम को बताएंगे। वहीं जलनिगम के जीएम आरके अग्रवाल का कहना है कि थोड़ा पानी पंप करने में कोई दिक्कत नहीं है। कई बार जाजमऊ पर जरूरत से ज्यादा सीवेज पहुंच चुका है।