हरेन पंड्या हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया, हाईकोर्ट का फैसला पलटा

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हरेन पंड्या हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया, हाईकोर्ट का फैसला पलटा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और गुजरात सरकार की अपीलों पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट यानी उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या हत्याकांड में 12 आरोपियों को दोषी ठहराया है। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की साल 2003 में हत्या करने के आरोपों का सामना कर रहे 12 लोगों को बरी करने के फैसले को सीबीआई और गुजरात सरकार ने चुनौती दी थी।

2003 Gujarat Home Minister Haren Pandya Murder Case Supreme Court Upholds Conviction Of 12 Accused :

पांड्या गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री थे। उनकी अहमदाबाद में सुबह की सैर के दौरान लॉ गार्डन के समीप 26 मार्च 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई।

सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने 12 लोगों को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश और आतंकवाद रोधी कानून (पोटा) के तहत अपराधों में दोषी ठहराया गया। उच्चतम न्यायालय ने इस साल 31 जनवरी को अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और गुजरात सरकार की अपीलों पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट यानी उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या हत्याकांड में 12 आरोपियों को दोषी ठहराया है। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की साल 2003 में हत्या करने के आरोपों का सामना कर रहे 12 लोगों को बरी करने के फैसले को सीबीआई और गुजरात सरकार ने चुनौती दी थी। पांड्या गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री थे। उनकी अहमदाबाद में सुबह की सैर के दौरान लॉ गार्डन के समीप 26 मार्च 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई। सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने 12 लोगों को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश और आतंकवाद रोधी कानून (पोटा) के तहत अपराधों में दोषी ठहराया गया। उच्चतम न्यायालय ने इस साल 31 जनवरी को अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।