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2020 बॉलीवुड की बेज्जती का साल: नेपोटिज्म, ड्रग्स और मौत देखने बाद, स्टार्स हुए सब्जी बेचने पर मजबूर

By आराधना शर्मा 
Updated Date

नई दिल्ली: साल 2020 ने हर किसी के लिए कुछ न कुछ समस्या ले कर आया। लेकिन अगर बॉलीवुड की बात करें तो ये साल बॉलीवुड के लिए सबसे खराब रहा। चाहे वो कोरोना के चलते थियेटर बंद होने या नेपोटिज्म, ड्रग्स और मौत के नाम रहा यह साल हर एक कहर बन कर रह गया।

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कुछ को कुदरत ने छीन लिया तो कुछ को बेरोजगारी और नाइंसाफी ने इसी वजह से ये साल बॉलीवुड की बेइज्जती का साल रहा। आपको बता दें, फिल्मों से ज्यादा फिल्मवालों के बुरे कारनामों के लिए यह साल याद किया जाएगा। आइये जानतें हैं किन कारणो से ये साल बॉलीवुड के लिए सबसे खराब रहा…

साल के 12 महीनों में बमुश्किल ढाई महीने ऐसे मिले जब फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन करने का मौका मिला। कोरोना वायरस की चपेट में देश आया और फिल्म व्यवसाय सीधे वेंटिलेटर पर पहुंच गया। सिनेमाघरों में ताले लटक गए और अधिकांश में अभी भी खुले नहीं हैं। जो फिल्म दिखा रहे हैं वो अच्छे दिनों का इंतजार कर रहे हैं कि कब दर्शक सिनेमाघर लौटेंगे। भय और तनाव के माहौल में भला कौन जान में जोखिम डाल कर मनोरंजन के लिए टिकट खरीदेगा।

सिनेमाघर बंद रहने से करोड़ों का नुकसान

यह तो हुई फिल्मों की बात। कोरोना के कारण सिनेमाघर बंद रहे और करोड़ों का नुकसान हुआ। इस नुकसान को जोड़ा नहीं जा सकता। वैसे कहने वाले कहते हैं पांच हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। महीनों तक फिल्म प्रोडक्शन बंद रहा जिसका असर आगामी महीनों में देखने को मिलेगा। कई कलाकार और क्रू मेंबर्स के आगे भूखे मरने की नौबत आ गई। फिल्म स्टारों की चमक खो गई। सिनेमाघर मालिकों और फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स की बोलती बंद हो गई। कई कर्मचारियों को काम से हाथ धोना पड़ा। किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि कब परिस्थितियां सामान्य होगी।

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कलाकारों की हालत भी खराब है। कई जूनियर कलाकार और क्रू मेंबर्स जिन्हें रोजाना पैसा मिलता था, सब्जी बेचने लगे। दूसरे काम करने लगे। घर लौट गए। बड़े सितारे अपनी चमक को धुंधली होते हुए असहाय रूप से देखते रहे। अब पता चला कि एक अदने से वायरस ने आम और खास के फर्क को बहुत कम कर दिया। कई मौत के मुंह में चले गए और कुछ ने मौत को खुद ही गले लगा लिया। आर्थिक रूप से स्थिति चरमरा गई।

नेपोटिज्म नामक कांटा

बॉलीवुड की प्रतिष्ठा पर जबरदस्त आंच आई है। जिन कलाकारों के पोस्टर लोग सीने से लगाए रखते थे उनको उन्होंने जूते तले दबा लिया। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जो आंधी चली उससे बड़े-बड़े दरख्त उखड़ गए। नेपोटिज्म की ऐसी हवा चली कि सितारा पुत्र-पुत्रियों को दिन में तारे नजर आने लगे। समझ आने लगा कि बॉलीवुड में कुछ लोगों की इतनी सख्त लामबंदी है कि बाहरी व्यक्ति को अपना स्थान और पहचान बनाने में कांटों पर चलना पड़ता है। उसकी राह में अंगारे बिछा दिए जाते हैं और जिनके बाप-दादा बॉलीवुड में हैं उनकी राह में फूल नजर आते हैं।

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