इस देश में मिला 2,200 साल पुराना हथियार बनाने वाला कारखाना

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इस देश में मिला 2,200 साल पुराना हथियार बनाने वाला कारखाना

नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा से आतंकवाद को पनाह देता आया है। उस हिंसक देश में हथियार बनाने का 2,200 साल पुराना कारखाना मिला है। पुरातत्वविदों ने उक्त कारखाने के अवशेष को पेशावर के निकट हयाताबाद से खोज निकालने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह कारखाना ईसा पूर्व की आखिरी दो शताब्दी के दौरान अस्तित्व में रहे इंडो-ग्रीक काल का हो सकता है। इंडो-ग्रीक मूल के लोग अफगानिस्तान से पेशावर आए थे। उन्होंने करीब 150 सालों तक वहां राज किया।

2200 Years Old Weapon Making Factory Found In This Country :

दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ पेशावर के पुरातत्वविद पिछले तीन साल से हयाताबाद इलाके में खोदाई करा रहे थे। यह इलाका खैबर जिले से भी लगा हुआ है। प्रोफेसर गुल रहीम का कहना है कि खोदाई में इंडो-ग्रीक काल के कुछ सिक्के भी मिले हैं। इसके अलावा यहां लोहा पिघलाने के बर्तन, चाकू व खुरपी जैसे औजार भी मिले हैं। इन सबके आधार पर ही अनुमान लगाया जा रहा है कि इस जगह धातुओं से हथियार बनाए जाते थे। पाकिस्‍तान के डॉन अखबार ने यह जानकारी प्रकाशित की है।

वहीं, पेशावर में पहली बार इंडो-ग्रीक काल के किसी सुनियोजित कारखाने के अवशेष की खोज हुई है। पुरातत्वविदों का कहना है कि इस कारखाने को तीन हिस्सों में बांटा गया था। इसके एक हिस्से में भट्टी थी। वहां पर संभवत: तीर, धनुष, खंजर और तलवारें भी बनाई जाती थी। पुरातात्विक सर्वेक्षक मोहम्मद नईम ने बताया कि बौद्ध काल में ईंट का इस्तेमाल होता था, जबकि इंडो-ग्रीक काल में मिट्टी से निर्माण किए जाते थे। इसी के चलते उनका संरक्षण कठिन था।

नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा से आतंकवाद को पनाह देता आया है। उस हिंसक देश में हथियार बनाने का 2,200 साल पुराना कारखाना मिला है। पुरातत्वविदों ने उक्त कारखाने के अवशेष को पेशावर के निकट हयाताबाद से खोज निकालने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह कारखाना ईसा पूर्व की आखिरी दो शताब्दी के दौरान अस्तित्व में रहे इंडो-ग्रीक काल का हो सकता है। इंडो-ग्रीक मूल के लोग अफगानिस्तान से पेशावर आए थे। उन्होंने करीब 150 सालों तक वहां राज किया। दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ पेशावर के पुरातत्वविद पिछले तीन साल से हयाताबाद इलाके में खोदाई करा रहे थे। यह इलाका खैबर जिले से भी लगा हुआ है। प्रोफेसर गुल रहीम का कहना है कि खोदाई में इंडो-ग्रीक काल के कुछ सिक्के भी मिले हैं। इसके अलावा यहां लोहा पिघलाने के बर्तन, चाकू व खुरपी जैसे औजार भी मिले हैं। इन सबके आधार पर ही अनुमान लगाया जा रहा है कि इस जगह धातुओं से हथियार बनाए जाते थे। पाकिस्‍तान के डॉन अखबार ने यह जानकारी प्रकाशित की है। वहीं, पेशावर में पहली बार इंडो-ग्रीक काल के किसी सुनियोजित कारखाने के अवशेष की खोज हुई है। पुरातत्वविदों का कहना है कि इस कारखाने को तीन हिस्सों में बांटा गया था। इसके एक हिस्से में भट्टी थी। वहां पर संभवत: तीर, धनुष, खंजर और तलवारें भी बनाई जाती थी। पुरातात्विक सर्वेक्षक मोहम्मद नईम ने बताया कि बौद्ध काल में ईंट का इस्तेमाल होता था, जबकि इंडो-ग्रीक काल में मिट्टी से निर्माण किए जाते थे। इसी के चलते उनका संरक्षण कठिन था।