अंधविश्वास: तंत्र-मंत्र के चक्कर में अपने पोते-पोती की बलि

भटिंडा। भटिंडा में अंधविश्वास का सनसनीखेज करने वाला मामला प्रकाश में आया है, यहां एक महिला ने अपने बेटे के साथ मिलकर उसके ही दो नवजात मासूमों को बलि पर चढ़ा दिया। महिला का कहना था कि उसे मरे हुए लोगों को जिंदा करने में सिद्धी प्राप्त है। इस प्रयोग के लिए इस कलयुगी महिला ने अपने ही बेटे के जिगर के टुकड़ो को लिया। बेटे के साथ मिलकर इस महिला ने पहले उन्हें करंट लगाया। जब उनकी मौत हो तब ट्यूबलाइट बल्ब तोड़े और बच्चों के मुंह में कांच भी डाले, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।




दरअसल 56 साल की निर्मल कौर नाम की महिला ने अपने बेटे के साथ मिलकर अपने ही मासूम पांच साल के पोते और तीन साल की पोती की बलि दे डाली। महिला और इसका बेटा दोनों तांत्रिक हैं और अपने आप को भगवान बताते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक इस तांत्रिक महिला ने एलान किया कि उसे सिद्दि मिलने वाली है लेकिन उसके लिए दो बच्चों की बलि जरुरी है। महिला ने कहा कि बलि देने के बाद उसमें शक्ति आ जाएगी और वो इन दोनों बच्चों को फिर से जिंदा कर देगी। और इस चक्कर में मां बेटे ने मिलकर दो मासूमों की जान ले ली। बच्चों की मां विरोध करती रही, लेकिन उसे पीटकर कमरे में बंद कर दिया।




इस घटना के बाद गांव वालों ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने तांत्रिक महिला और इसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट में डी.एस.पी. कुलदीप सिंह सोही के हवाले से लिखा गया है, ‘काफी दिनों से ये मां-बेटा खुद में शेषनाग की आत्मा आने का दावा कर रहे थे। इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले महिला पर अपने पति से भी झगड़ा करने के आरोप हैं। कत्ल के समय बच्चों की मां और दोनों बुआ भी घर पर थीं, लेकिन उनको कमरे में बंद कर दिया गया था। बच्चों की मां और बुआ दोनों की हालत दयनीय है। उनको डाक्टरी सहायता दी जा रही है।” वहीं बच्चों की मां रोजी ने पुलिस को बताया कि जब मेरी सास ने उसे इस बारे में बताया तो उसने इसका विरोध किया, लेकिन रोजी को कमरे में बंद कर दिया गया।

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