27 साल की भारतीय लड़की ने 1 अरब डॉलर की कंपनी, रचा इतिहास

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27 साल की भारतीय लड़की ने 1 अरब डॉलर की कंपनी, रचा इतिहास

नई दिल्ली। एक अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाले फैशन प्लेटफॉर्म जिलिंगो का रास्ता दिसंबर 2014 में शुरू हुआ था। उस वक्त अंकिती बोस (27) सिक्योई इंडिया में एनालिस्ट का काम करती थीं। साउथ ईस्ट एशिया के फैशन ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म जीलिंगो तेजी से बड़ी कंपनी के तौर पर उभर रही है। जिलिंगो युनिकॉर्न स्टेटस पाने के बेहद करीब है। अंकिति बोस पहली ऐसी महिला सीईओ है जिनकी कंपनी को युनिकार्न का स्टेटस मिला है।

27 Year Old Ankiti Bose Set To Become First Indian Female Ceo Of Unicorn Zilingo :

क्या होता है यूनिकॉर्न

यूनिकॉर्न एक टर्म है जिसे उन स्टार्टअप्स को दिया जाता है जिनकी वैल्यू एक अरब डॉलर के करीब हो जाती है। अंकिति के स्टार्टअप की वैल्यू अभी 970 मिलियन डॉलर पहुंच चुकी है। इस टर्म की शुरुआत 2013 में वेंचर कैपिटल एलिन ली ने की थी। इसके लिए काल्पनिक जानवर ‘यूनिकॉर्न’ का इस्तेमाल किया गया क्योंकि ऐसे सफल वेंचर भी कम ही देखने को मिलते हैं।

जीलिंगो का हेडक्वॉर्टर फिलहाल सिंगापुर में है और इसकी टेक टीम बेंगलुरु से काम करती है। जहां इसके दूसरे को फाउंडर आईआईटी गुवाहाटी से पढ़े ध्रुव कपूर (24 साल) काम देखते हैं। उनकी टीम में करीब 100 लोग हैं। अब जीलिंगो भारतीय उद्यमी द्वारा चलाई जा रही सफल कंपनियों से एक बन चुकी है। इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे।

कहां से आया आईडिया

मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से अंकिति ने 2012 में गणित और अर्थशास्त्र से ग्रेजुएशन किया है। अंकिति के मुताबिक वह एक बार बैंकॉक गई हुई थी और वहां उन्होंने चटूचक मार्केट देखी जहां समाने बेचने वालों ने लगभग 15000 स्टॉल लगाए हुए थे। इसके बाद अंकिति को लगा कि उन्हें इन लोगों को और ज्यादा अवसर मिलने चाहिए। इसके बाद उन्होंने यह आइडिया सोचा।

यह कंपनी पहले थाइलैंड और कंबोडिया में स्थापित हुई आज लगभग 8 कंपनियों में व्यापार कर रही है और कंपनी में 400 लोग कार्यरत हैं।अंकिति ने कहा कि उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की वह दिन के 18 घंटे काम करती थी। वो कहती है कि उन्हें इस काम के दौरान मजा आता था।

नई दिल्ली। एक अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाले फैशन प्लेटफॉर्म जिलिंगो का रास्ता दिसंबर 2014 में शुरू हुआ था। उस वक्त अंकिती बोस (27) सिक्योई इंडिया में एनालिस्ट का काम करती थीं। साउथ ईस्ट एशिया के फैशन ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म जीलिंगो तेजी से बड़ी कंपनी के तौर पर उभर रही है। जिलिंगो युनिकॉर्न स्टेटस पाने के बेहद करीब है। अंकिति बोस पहली ऐसी महिला सीईओ है जिनकी कंपनी को युनिकार्न का स्टेटस मिला है। क्या होता है यूनिकॉर्न यूनिकॉर्न एक टर्म है जिसे उन स्टार्टअप्स को दिया जाता है जिनकी वैल्यू एक अरब डॉलर के करीब हो जाती है। अंकिति के स्टार्टअप की वैल्यू अभी 970 मिलियन डॉलर पहुंच चुकी है। इस टर्म की शुरुआत 2013 में वेंचर कैपिटल एलिन ली ने की थी। इसके लिए काल्पनिक जानवर 'यूनिकॉर्न' का इस्तेमाल किया गया क्योंकि ऐसे सफल वेंचर भी कम ही देखने को मिलते हैं। जीलिंगो का हेडक्वॉर्टर फिलहाल सिंगापुर में है और इसकी टेक टीम बेंगलुरु से काम करती है। जहां इसके दूसरे को फाउंडर आईआईटी गुवाहाटी से पढ़े ध्रुव कपूर (24 साल) काम देखते हैं। उनकी टीम में करीब 100 लोग हैं। अब जीलिंगो भारतीय उद्यमी द्वारा चलाई जा रही सफल कंपनियों से एक बन चुकी है। इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे। कहां से आया आईडिया मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से अंकिति ने 2012 में गणित और अर्थशास्त्र से ग्रेजुएशन किया है। अंकिति के मुताबिक वह एक बार बैंकॉक गई हुई थी और वहां उन्होंने चटूचक मार्केट देखी जहां समाने बेचने वालों ने लगभग 15000 स्टॉल लगाए हुए थे। इसके बाद अंकिति को लगा कि उन्हें इन लोगों को और ज्यादा अवसर मिलने चाहिए। इसके बाद उन्होंने यह आइडिया सोचा। यह कंपनी पहले थाइलैंड और कंबोडिया में स्थापित हुई आज लगभग 8 कंपनियों में व्यापार कर रही है और कंपनी में 400 लोग कार्यरत हैं।अंकिति ने कहा कि उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की वह दिन के 18 घंटे काम करती थी। वो कहती है कि उन्हें इस काम के दौरान मजा आता था।