गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर 2 साल की जेल और 10 लाख का जुर्माना

Ram-Vilas-Paswan

नई दिल्ली। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 में गलत या भ्रामक विज्ञापन देने पर 2 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया। बता दें कि इससे पहले मंत्री ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2015 वापस ले लिया।

3 Year Jail For Misleading Advertising :

आदेश नहीं मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
नए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि कोई विनिर्माता या सेवा प्रदाता गलत या भ्रामक विज्ञापन देता है जो उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है तो उसे दो साल तक की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। यदि किसी के खिलाफ ऐसे एक से ज्यादा मामले हों तो हर अगले मामले के लिए 5 साल तक की कैद और 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

नकली उत्पादों के विनिर्माताओं, भंडारकों, विक्रेताओं और वितरकों या मिलावटी सामान आयात करने वालों के लिए चार तरह के प्रावधान हैं।

1. किसी उत्पाद से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचता है तो छह महीने की कैद और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
2. अगर उपभोक्ता के स्वास्थ्य को मामूली नुकसान पहुंचता है तो उस स्थिति में एक साल तक की कैद और तीन लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
3. ऐसे उत्पादों से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को ज्यादा जोखिम के मामले में सात साल तक की कैद और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना तथा मृत्यु की स्थिति में सात साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रवधान है।
4. पहली बार दोषी पाए जाने पर उत्पाद विनिर्माता या आपूर्तिकर्ता का लाइसेंस दो साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है जबकि दूसरी बार में लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।

नई दिल्ली। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 में गलत या भ्रामक विज्ञापन देने पर 2 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया। बता दें कि इससे पहले मंत्री ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2015 वापस ले लिया।आदेश नहीं मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान नए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि कोई विनिर्माता या सेवा प्रदाता गलत या भ्रामक विज्ञापन देता है जो उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है तो उसे दो साल तक की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। यदि किसी के खिलाफ ऐसे एक से ज्यादा मामले हों तो हर अगले मामले के लिए 5 साल तक की कैद और 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।नकली उत्पादों के विनिर्माताओं, भंडारकों, विक्रेताओं और वितरकों या मिलावटी सामान आयात करने वालों के लिए चार तरह के प्रावधान हैं।1. किसी उत्पाद से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचता है तो छह महीने की कैद और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। 2. अगर उपभोक्ता के स्वास्थ्य को मामूली नुकसान पहुंचता है तो उस स्थिति में एक साल तक की कैद और तीन लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। 3. ऐसे उत्पादों से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को ज्यादा जोखिम के मामले में सात साल तक की कैद और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना तथा मृत्यु की स्थिति में सात साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रवधान है। 4. पहली बार दोषी पाए जाने पर उत्पाद विनिर्माता या आपूर्तिकर्ता का लाइसेंस दो साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है जबकि दूसरी बार में लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।