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32 बार चुनाव हारने के बाद नहीं मानी हार, अब भी है प्रधानमंत्री बनने की आस

By पर्दाफाश समूह 
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लखनऊ। चुनाव के चलते हर पार्टी के उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्र और ग्राम से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में लगे हुए हैं। वहीं ओडिशा के अस्का एवं बेहरामपुर से 17वीं लोकसभा के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ रहे 84 साल के श्याम बाबू सुबुद्धि भी अपने दम पर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। श्याम बाबू बुजुर्ग जरूर हो चुके हैं लेकिन चुनाव लड़ने को लेकर उनका जज्बा अभी भी जारी है। वह 57 सालों से चुनाल लड़ रहे हैं। श्याम बाबू का चुनाव चिन्ह भी बड़ा रोचक है। उनका चुनाव चिन्ह ‘बल्ला’ है जिसके पीछे लाल रंग से ‘प्रधानमंत्री उम्मीदवार’ लिखा हुआ है।

84 साल के श्याम बाबू का कहना है कि “वह ओडिशा की दो सीटों से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। ये दो सीटें अस्का एवं बेहरामपुर हैं।” श्याम बाबू खुद लोगों के बीच जाकर अपना प्रचार कर रहे हैं। इसके लिए वह बसों और ट्रेनों में घूम रहे हैं। बाजारों में लोगों से मिलकर अपने लिए वोट मांग रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं चुनाव जीतूं या फिर हारूं, मैं लगातार चुनाव लड़ता रहुंगा।

श्याम बाबू 1962 से निर्दलीय विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि वह अब तक 32 बार चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीत नहीं मिली। श्याम बाबू कहते हैं कि “मुझे लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है चाहे जीत मिले या नहीं।” श्याम बाबू का सपना है कि वो प्रधानमंत्री बने और शायद यही कारण है कि उन्होंने अपने चिन्ह बल्ला के पीछे प्रधानमंत्री उम्मीदवार लिखा हुआ है।

ऐसे बहादुर और मेहनती शख़्स पर लोगों की नज़र शायद ही पड़ती होगी। क्योंकि उनका प्रचार कोई न्यूज़ चैनल या अख़बार नहीं कर रहा है। एक तरफ जहां श्याम बाबू ने ये बताया कि वो 32 बार चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीत नहीं मिली है, फिर भी वो निराश नहीं हुए, ना ही उन्होंने अपने हौसलों को कमजोर होने दिया। आज भी वो 32 बार चुनाव हारने के बाद भी चुनाव लड़ने के लिए एक बार फिर से खड़े हैं। लोगों को चाहिए कि ऐसे उम्मीदवारों का चयन करें जो उनके आस पास हो जिसे वो अच्छे से जानते हैं। लेकिन आज की जनता को पता नहीं क्या हो चुका है वो एक ऐसे शख़्स को चुनती है जिसे ना तो क्षेत्र से कोई मतलब होता और ना ही लोगों कि समस्याओं से कोई मतलब होता है।

आज हम उसी नेता को चुनते हैं जो हमारी समस्या को समझना तो दूर उस समस्या तक पहुंच भी नहीं पाता है। हमें चाहिए कि हम श्याम बाबू जैसे ईमानदार और मेहनती लोगों का चुनाव करें ताकि हमारा इसमें भला हो और उन्हें भी क्षेत्र में कुछ करने का मौका मिल सकें। हम उन्हें भी परख सकें ना कि लालच में आके हम उनको चुने जिन्हें सिर्फ अपने से मतलब हो जनता के दुख दर्द से नहीं।

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