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छात्रों को लाने के लिए 40 बसें कोटा रवाना : अरविंद केजरीवाल

40 Buses Leave For Kota To Bring Students Arvind Kejriwal

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों के लिए राहत की खबर है. दिल्ली के छात्रों को लेने के लिए बसें निकल चुकी हैं. उन्‍होंने बताया कि सभी बसें छात्रों को लेकर 2 मई को वापस आ जाएंगी. इसके बाद कोटा से आने वाले छात्रों को 14 दिन तक होम क्‍वारेंटाइन में रहना होगा.

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केजरीवाल ने बताया कि केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद बसों को कोटा भेजा जा रहा है, ता‍कि लॉकडाउन के चलते वहां फंसे छात्रों को वापस लाया जा सके. साथ ही मुख्‍यमंत्री ने प्रवासी मजदूरों पर कहा कि उन्‍हें घर भेजने के लिए केंद्र सरकार ने जो निर्देश जारी किया है, उस पर दिल्‍ली सरकार लगातार दूसरे राज्‍यों से बात कर रही है. उन्‍होंने कहा कि जब तक संबंधित राज्‍यों से इस बाबत कुछ तय नहीं हो जाता है तब तक इंतजार कीजिए.

प्रति 10 लाख लोगों पर 2300 लोगों के टेस्ट

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार यहां प्रति 10 लाख लोगों पर 2300 लोगों के टेस्ट कर रही है. उन्होंने बताया कि अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए 1100 लोग ठीक हो चुके हैं और उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी भी दे दी गयी है.

कोटा में फंसे दिल्ली के छात्रों को भी वापस लाएगी सरकार

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मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने गुरुवार को कहा था कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी के उन छात्रों को वापस लाने के प्रबंध कर रही है, जो लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से राजस्थान के कोटा में फंसे हैं. अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘दिल्ली सरकार कोटा में फंसे दिल्ली के छात्रों को जल्द वापस लाने के लिए प्रबंध कर रही है.’ दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने भी केजरीवाल को पत्र लिखकर कोटा में फंसे दिल्ली के छात्रों को जल्द वापस लाने की मांग की थी.

यात्रा के लिए लोगों को अपना पंजीकरण कराना होगा

इसके अलावा दिल्‍ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा का कहना था कि दिल्ली सरकार और पुलिस दूसरे प्रदेश के लोगों के आवागमन के लिए तौर-तरीकों को अंतिम रूप दे रही है.  हम विभिन्न राज्यों के निवासी आयुक्तों के संपर्क में हैं. हालांकि यात्रा के लिए लोगों को अपना पंजीकरण कराना होगा. कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें.

अब तक 23 हजार छात्र हुए रवाना

कोटा से अब तक तकरीबन 23 हजार छात्र अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो चुके हैं. इसमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के 11 हजार से अधिक स्टूडेंट थे. इसके बाद उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, दमन-दीव, दादर-नागर हवेली, पंजाब-चंडीगढ़, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा राजस्थान के स्टूडेंट हैं.  

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