43 प्रतिशत लोगों ने माना 2016 में दी है रिश्वत, सामने आया भ्रष्टाचार पर हुआ सर्वे

नई दिल्ली। भारत में रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध है, लेकिन इसके बावजूद यह अपराध सबसे बड़े और संगठित स्तर पर होता है। रिश्वतखोरी को लेकर भारत में आपराधिक मामले सबसे कम दर्ज होते हैं क्योंकि इस अपराध को अंजाम देने वाले दोनों ही पक्ष दोषी हैं और दोनों ही पक्ष अपने अपने लाभ के लिए अपराध को अंजाम देते हैं। देश में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार रिश्वत के रूप में होता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। पिछले करीब 5 सालों से देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अभियान छिड़ा हुआ है। वर्तमान केन्द्र सरकार भी भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाकर सत्ता में आई थी। इसी आधार पर एक संस्था ने आम लोगों के बीच सर्वे कर यह जानने की कोशिश की कि पिछले दो सालों में भ्रष्टाचार में कितनी कमी आई है? जिसके आंकड़े तो चौंकाने वाले रहे लेकिन राहत की बात ये है कि लोगों ने भ्रष्टाचार के खत्म होने की उम्मीद अभी नहीं छोड़ी है। कहीं न कहीं उनकी सोच में परिवर्तन आया है, उन्हें लगने लगा है कि आने वाले समय में उन्हें भ्रष्टाचार से एक हद तक निजात मिल जाएगा।




सर्वे के नतीजे—
1— केन्द्र सरकार के तहत आने वाली संस्थाओं में रिश्वतखोरी पर लगाम लगी है।
2— राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सरकारी संस्थाओं में अभी भ्रष्टाचार को लेकर वह डर नहीं है जो केन्द्र सरकार की संस्थाओं में हैं।
3— जिला स्तर के कार्यालयों में भ्रष्टाचार की जड़ें ज्यादा गहरी हैं।
4— पुलिस और स्थानीय निकाय में सबसे ज्यादा लोगों ने दी रिश्वत।
5— रिश्वतखोरी के मामले में स्थानीय निकायों ने पुलिस को पीछे छोड़ा।
6— रिश्वत देने वालों में 32 प्रतिशत लोगों ने माना नगर निकाय के अधिकारियों ने उनसे रिश्वत मांगी, जबकि 31 प्रतिशत लोगों से पुलिस और ट्रैफिक पुलिस को रिश्वत देने की बात स्वीकार की है। 31 प्रतिशत लोगों को संपत्ति के रजिस्ट्रेशन, वाहन रजिस्ट्रेशन और स्थानीय करों को भरने के दौरान घूंस देनी पड़ी। वहीं 6 प्रतिशत लोगों ने बिजली विभाग को रिश्वत देने की बात कही है।
7— 20 प्रतिशत लोगों ने माना कि एक से ज्यादा बार देनी पड़ी रिश्वत।
8— 22 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने कभी रिश्वत नहीं दी।
9— 35 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हों रिश्वत देने की जरूरत नहीं पड़ी।
10— सर्वे का हिस्सा बने 68 प्रतिशत लोगों ने विश्वास जताया है कि अपने वाले 5 सालों के भीतर भ्रष्टाचार में बड़ी कमी आएगी। जिस तरह से सरकारी कार्यप्रणाली में नई और आधुनिक तकनीकी का प्रयोग बढ़ा उससे लोगों में भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद जागी है।




अब आपको बताते हैं सर्वे लोकलसर्किल डॉट कॉम नाम की वेबसाइट द्वारा किया गया है। जिसके मॉडल के रूप में देश के 56 शहरों में करीब 15000 लोगों लिया गया है। जिसमें 30 फीसदी महिलाओं और 70 पुरूषों की भागीदारी को सुनिश्चित किया गया है। जिन राज्यों में सर्वे किए गए उनमें के गुजरात, दिल्ली और महाराष्ट्र केवल ऐसे राज्य रहे जहां के लोगों ने कहा कि राज्य सरकारें भ्रष्टाचार को लेकर थोड़ी गंभीर हुई हैं, जिसके नतीजे सामने आना शुरू हो गए हैं। जबकि अ​धिकांश राज्यों में भ्रष्टाचार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में राज्य सरकारों की भूमिका पर अभी प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।