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भारत का 49 साल पुराना ऐतिहासिक सपना हुआ साकार, जानें क्या है खास

49 Years Old Historical Dream Of India Comes True Know What Is Special

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कई क्षेत्रों में विकास हुआ है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक सपना साल 1980 में देखा गया था कि भारत में यूरोपियन स्टाइल में बिना इंजन वाली ट्रेन दौड़े। ये सपना केवल 18 महीने में अक्टूबर 2018 में साकार हो सका। यह कम ही लोग जानते हैं कि देश की पहली बिना इंजन वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे ट्रेन 18 प्रोजेक्ट नाम दिया गया था, उसे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई की मेहनतकश वेल्डर, फिटर महिला रेलकर्मियों ने मिलकर पूरा करने में अहम योगदान दिया। इस समय वंदे भारत एक्सप्रेस 180 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ सकती है। जबकि, इस ट्रेन की तकनीक में मामूली संशोधन कर इसे 220 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से दौड़ाया जा सकता है। यह जानकारी ट्रेन 18 के जनक आइसीएफ चेन्नई के सेवानिवृत्त जीएम सुधांशु मणि ने दी।

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दरअसल, उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोसिएशन की ओर से लोक निर्माण विभाग के अंवेषणालय भवन में आयोजित व्याख्यान में सुधांशु मणि ने कहा कि अप्रैल 2017 में ऐसी ट्रेन बनाने को लेकर आइसीएफ के अधिकारियों के साथ मंथन किया गया। तब कोई भी इस प्रोजेक्ट में साथ आने को तैयार नहीं था। तत्कालीन सीआरबी ने मेरे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी और 200 करोड़ रुपये का बजट दिया।

बता दें, यूरोप की एक कंपनी को 22 करोड़ रुपये में ट्रेन 18 की डिजाइन का काम दिया। उस कंपनी को आइसीएफ बुलाकर पूरी डिजाइन पर अपने अधिकारियों के साथ काम किया गया। इसके बाद इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और स्टोर अनुभाग के श्रेष्ठ अधिकारियों की टीम दिनभर इस काम में जुटनी शुरू हो गई। रात में कांफें्रस में सभी से उस दिन की प्रोग्रेस की डिटेल ली जाती थी। सुधांशु मणि ने बताया कि हाई स्पीड ट्रेन जापान जरूर दे रहा है, लेकिन उससे यह करार होना चाहिए कि वह भारत में आकर अपनी डिजाइन को साझा करे।

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