सिजेरियन डिलीवरी को लेकर फैलाये गये 5 झूठ

cesarean delivery
सिजेरियन डिलीवरी को लेकर फैलाये गये 5 झूठ

नई दिल्ली। आजकल महिलाओं के मन में सिजेरियन डिलीवरी से मां बनने को लेकर कई तरह के कंफ्यूजन होते है। अमूमन महिलाओं का ये मानना है कि नॉर्मल डिलीवरी की जगह सिजेरियन डिलीवरी से कई हेल्थ इश्यू हो सकते हैं जबकि मेडिकल एक्सपर्ट ऐसा नहीं मानते। आइए, आपको बताते हैं सिजेरियन से जुड़े 5 झूठ और उनकी सच्चाई-

5 Lies Spread About Cesarean Delivery :

झूठ— सिजेरियन डिलीवरी में दर्द नहीं होता
सच— बच्चे को जन्म चाहे सिजेरियन से हो या नॉर्मल डिलीवरी से दोनो में दर्द होता है। दोनो में बस इतना अंतर होता है कि एनेस्थेसिया देने की वजह से ऑपरेशन करते वक्त दर्द नहीं होता लेकिन जैसे-जैसे एनेस्थेसिया का असर खत्म होने लगता है, तो दर्द बढ़ता जाता है। दोनों तरह की डिलीवरी में 10-15 दिनों तक दर्द, असहजता की स्थिति बनी रहती है।

मिथक— सिजेरियन डिलीवरी के बाद दूसरा बच्चा कभी नॉर्मल डिलीवरी से नहीं होता

सच— यह बात बिल्कुल गलत है। सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कई मेडिकल कंडीशन को देखकर ही फैसला लिया जाता है कि गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नॉर्मल। बच्चे को जन्म देने की कॉम्पलिकेशन को भी देखकर ही निर्णय लिया जाता है।

 

झूंठ— सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चे और मां के बीच बॉन्डिंग नहीं होती।

सच— डिलीवरी सिजेरियन हो या नॉर्मल, दोनो में ही नवजात बच्चे की अपनी मां से प्राकृतिक तौर पर बॉन्डिंग मजबूत ही होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चा मां के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताता है और मां से उसे सबसे ज्यादा देखभाल मिलती है।

झूठ— सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग में होती है दिक्कत

सच— सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग में कोई दिक्कत नही आती। सिजेरियन के बाद मां की दूध मिलाने की क्षमता या दूध पर कोई असर नहीं पड़ता। सिजेरियन एक प्रक्रिया है, बच्चे को मां के गर्भ से बाहर निकालने की। दोनों ही प्रक्रिया में मां कोई सीरियस हेल्थ इश्यू न होने पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है।

झूठ— सिजेरियन डिलीवरी से मां-बच्चे की सेहत पर होता है असर

सच— नॉर्मल या सिजेरियन दोनों ही तरह की डिलीवरी में मां और बच्चे दोनों को प्यार और एक्सट्रा केयर की जरुरत होती है। ऐसा कुछ भी नहीं है कि सिजेरियन के बाद मां और बच्चे पर इसका कोई असर होता है।

नई दिल्ली। आजकल महिलाओं के मन में सिजेरियन डिलीवरी से मां बनने को लेकर कई तरह के कंफ्यूजन होते है। अमूमन महिलाओं का ये मानना है कि नॉर्मल डिलीवरी की जगह सिजेरियन डिलीवरी से कई हेल्थ इश्यू हो सकते हैं जबकि मेडिकल एक्सपर्ट ऐसा नहीं मानते। आइए, आपको बताते हैं सिजेरियन से जुड़े 5 झूठ और उनकी सच्चाई- झूठ— सिजेरियन डिलीवरी में दर्द नहीं होता सच— बच्चे को जन्म चाहे सिजेरियन से हो या नॉर्मल डिलीवरी से दोनो में दर्द होता है। दोनो में बस इतना अंतर होता है कि एनेस्थेसिया देने की वजह से ऑपरेशन करते वक्त दर्द नहीं होता लेकिन जैसे-जैसे एनेस्थेसिया का असर खत्म होने लगता है, तो दर्द बढ़ता जाता है। दोनों तरह की डिलीवरी में 10-15 दिनों तक दर्द, असहजता की स्थिति बनी रहती है। मिथक— सिजेरियन डिलीवरी के बाद दूसरा बच्चा कभी नॉर्मल डिलीवरी से नहीं होता सच— यह बात बिल्कुल गलत है। सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कई मेडिकल कंडीशन को देखकर ही फैसला लिया जाता है कि गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नॉर्मल। बच्चे को जन्म देने की कॉम्पलिकेशन को भी देखकर ही निर्णय लिया जाता है।   झूंठ— सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चे और मां के बीच बॉन्डिंग नहीं होती। सच— डिलीवरी सिजेरियन हो या नॉर्मल, दोनो में ही नवजात बच्चे की अपनी मां से प्राकृतिक तौर पर बॉन्डिंग मजबूत ही होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चा मां के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताता है और मां से उसे सबसे ज्यादा देखभाल मिलती है। झूठ— सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग में होती है दिक्कत सच— सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग में कोई दिक्कत नही आती। सिजेरियन के बाद मां की दूध मिलाने की क्षमता या दूध पर कोई असर नहीं पड़ता। सिजेरियन एक प्रक्रिया है, बच्चे को मां के गर्भ से बाहर निकालने की। दोनों ही प्रक्रिया में मां कोई सीरियस हेल्थ इश्यू न होने पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है। झूठ— सिजेरियन डिलीवरी से मां-बच्चे की सेहत पर होता है असर सच— नॉर्मल या सिजेरियन दोनों ही तरह की डिलीवरी में मां और बच्चे दोनों को प्यार और एक्सट्रा केयर की जरुरत होती है। ऐसा कुछ भी नहीं है कि सिजेरियन के बाद मां और बच्चे पर इसका कोई असर होता है।