मोटी रकम डकारने वाले कर रहे मौज, किसान आत्महत्या के लिए हो रहा मजबूर

नई दिल्ली: देश के 57 लोगों पर बैंकों का 85 हजार करोड़ रपए बकाया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों को देखकर सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि बैंक की मोटी रकम डकारने वाले मौज कर रहे हैं और 20-25 हजार रुपये का कर्ज लेने वाला किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 500 करोड़ रपए से अधिक कर्ज लेने वाले और उसे नहीं लौटाने वालों के बारे में रिजर्व बैंक की रिपोर्ट देखने के बाद यह कहा। साथ ही उसने केंद्रीय बैंक से पूछा कि आखिर क्यों ने ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक कर दिए जाएं।



चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर, जस्टिस धनंजय चन्द्रचूड और एल नागेश्वर राव की बेंच ने कहा कि आखिर ये लोग कौन हैं जिन्होंने कर्ज लिया और उसे लौटा नहीं रहे हैं। आखिर कर्ज लेकर पैसा नहीं लौटाने वाले व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि अगर सीमा 500 करोड़ रपए से कम कर दी जाए तो फंसे कर्ज की यह राशि एक लाख करोड़ रपए से ऊपर निकल जाएगी। अदालत ने कहा कि अगर लोग आरटीआई के जरिए सवाल पूछते हैं, तो उन्हें यह जानने का हक है कि आखिर कर्ज नहीं लौटाने वाले कौन हैं। अदालत ने रिजर्व बैंक से पूछा कि आखिर ऐसे लोगों के बारे में सूचना क्यों रोकी जानी चाहिए।बेंच ने कहा कि लोगों को यह जानना चाहिए कि आखिर एक व्यक्ति ने कितना कर्ज लिया और उसे कितना लौटाना है। इस तरह की राशि के बारे में लोगों को जानकारी मिलनी चाहिए। आखिर सूचना को क्यों छिपाया जाए।




रिजर्व बैंक की तरफ से पेश अधिवक्ता ने इस सुझाव का विरोध किया और कहा कि कर्ज नहीं लौटा पाने वाले सभी कर्जदार जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार वह बैंकों के हितों में काम कर रहा है और कानून के मुताबिक कर्ज नहीं लौटाने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। इस पर अदालत ने कहा कि रिजर्व बैंक को देश हित में काम करना चाहिए, न कि केवल बैंकों के हित में।गैर-सरकारी संगठन सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की तरफ से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बकाया कर्ज राशि के खुलासे का समर्थन किया और दिसम्बर 2015 के शीर्ष अदालत के एक फैसले का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि रिजर्व बैंक को सभी सूचना उपलब्ध करानी है।

अदालत ने कहा कि वह कर्ज नहीं लौटाने वालों के नामों के खुलासे संबंधी पहलुओं पर 28 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। अदालत ने नहीं लौटाये जा रहे कर्ज की बढ़ती राशि पर चिंता जताते हुए कहा था कि लोग हजारों करोड़ रपए ले रहे हैं और अपनी कंपनियों को दिवालिया दिखाकर भाग जा रहे हैं लेकिन वहीं 20-25 हजार कर्ज लेने वाले गरीब किसान परेशान होते हैं।