6 केडी में रहेंगे एसपी सिंह, इस शापित बंगले में जो भी रहा तबाह हो गया राजनीतिक करियर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही नई सरकार ने पिछले हफ्ते अपने मंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित किए गए। इसमें सीएम योगी आदित्य नाथ के बगल वाला बंगला 6 कालिदास मार्ग किसी को नहीं दिया गया था। अब यह बंगला बीजेपी सरकार में पशुधन, लघु सिचाई और मत्सय विभाग के कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल को दिया गया है। दरअसल इस सरकारी आवास को ‘भूत बंगला’ या ‘शापित बंगले’ के रूप में जाना जाता है और कहा जाता है कि जो इस बंगले में रहने गया, उसका बुरा होना तय है। इसे संयोग कहे या अंधविश्वास यहां रहने वालों का कभी भला नहीं हुआ। पहले चरण में मंत्रियों को कुल 39 बंगले आवंटित किए गए थे, लेकिन यह बंगला किसी को नहीं दिया गया था। अब मंत्री एसपी सिंह बघेल ने इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए इसमें रहने का फैसला किया है।




बंगले में रहने के फैसले पर एसपी सिंह बघेल का कहना है, ‘मैंने इस बंगले के बारे में कई कहानियां सुन रखी हैं। जिसका ईश्वर में विश्वास हो उस पर ऐसे अंधविश्वास का असर नहीं होता। मैं इसी घर में रहूंगा।’ रामनवमी के दिन मैं इस घर में प्रवेश करूंगा। मुझे इस बंगले में रहने में कोई दिक्कत नहीं है। राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि इस बंगले में रहने वाला को या तो अपना पद गंवाना पड़ा है या फिर उनका राजनीतिक करियर ही तबाह हो गया। इसी बंगले में रहने की वजह से अमर सिंह का सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से झगड़ा हुआ था। यूपी में मुलायम की सरकार के दौरान अमर सिंह इसी बंगले में रहते थे, जिसके बाद दोनों का आपस में झगड़ा हो गया था और अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

बसपा सरकार के कद्दावर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा भी इसी बंगले में रहते थे। इनका नाम सीएमओ मर्डर केस और उसके बाद अन्य घोटालों में आया। यही नहीं उन्हें जेल भी जाना पड़ा। फिलहाल वह जमानत पर है। अखिलेश के करीबी माने जाने वाले जावेद अब्द को अखिलेश के बगल में छह नंबर बंगला मिला था। अब्दी को राज्यमंत्री का दर्ज दिया गया था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में अखिलेश यादव ने उन्हें पदों से बर्खास्त कर दिया था।

साल 2012 में जब यूपी में सत्ता बदली तो उस वक्त श्रम मंत्री वकार अहमद शाह को छह नंबर बंगला दिया गया था। वे बंगले में कुछ वक्त रहे और एक दिन अचानक उनकी तबियत खराब हो गई। इसके बाद से वे बिस्तर से उठे नहीं है। बाद में उनके परिवार ने वह बंगला खाली कर दिया था। कई साल पहले यह बंगला पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव को आवंटित किया गया था। वह नोएडा में जमीन घोटाले में अब तक जेल में हैं। पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ला भी यहां रहे और उन्हें भी एनआरएचएम घोटाले में जेल जाना पड़ा।




मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बगल का बंगला होने की वजह से तत्कालीन मंत्री राजेंद्र चौधरी ने इसे अपने नाम आवंटित करा लिया। इस आवास में शिफ्ट हुए 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि उनसे एक अहम मंत्रालय छीन लिया गया और वे केवल राजनैतिक पेंशन मंत्री रह गए। राजेंद्र चौधरी ने इसका जिम्मेदार इसी बंगले को माना और 24 घंटे में ही इसे खाली कर दिया। चौधरी के बाद यह आवास सीएम के एक अन्य करीबी जावेद आब्दी को मिला। आब्दी जब इसमें आए तो उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन थे। कुछ ही दिन बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।

इस बंगले पर अभी तक जावेद आब्दी ही काबिज थे लेकिन नई सरकार में अब यह किसी नए नेता को मिलेगा। ऐसे में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे पहले कृषि मंत्री रहे आनंद सिंह को दिया गया। कुछ दिनों बाद वह बर्खास्त हो गए। इसके बाद यह बंगला कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा को मिला। कुछ ही महीनों बाद ओझा को भी बर्खास्त होना पड़ा। बाद में जब शादाब फातिमा मंत्री बनीं तो विधायक निवास छोड़कर इसमें शिफ्ट हो गईं, लेकिन वह भी सपा के आपसी विवाद में बर्खास्त कर दी गईं।