बेटों के ठुकराने के बाद बुजुर्ग महिला बनी नौजवानों के लिए ‘मिसाल’

63 Year Old E Rickshaw Driver Veenapani

कहते हैं मां-बाप का साया अगर सिर पर हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। वो बचपन में हमें पढ़ाने-लिखाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं ताकि उनके बच्चों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। लेकिन जब वही बेटा बड़ा होकर बुजुर्ग मां-बाप की बुढ़ापे की लाठी बनने के बजाय दर-दर भटकने पर मजबूर कर दे, तो इससे शर्मनाक वाकया और कोई हो ही नहीं सकता। एक ऐसा ही मामला इलाहाबाद से सामने आया, जहां एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को 63 साल की उम्र में रोटी के लिये रोजगार करने पर मजबूर कर दिया। हालांकि यह मामला एक साल पुराना है, लेकिन इस कहानी की दिलचस्प बातें आज हम आपको बताने जा रहे हैं।




इलाहाबाद में रहने वाली वीणापाणी को उसके ही बेटो ने खुद से दूर कर दिया, लेकिन वीणापाणी ने उस वक़्त भी हिम्मत नहीं हारी और 63 साल की उम्र में वो शान से इलाहाबाद की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती हैं। हालांकि इन सबके लिये बुजुर्ग महिला को कड़ी मशक्कत और कठिनायियों से गुजरना पड़ा।


अपनों से कोई सहारा नहीं मिला–

वीणापाणी के पति ने दूसरी शादी कर उन्हे पहले ही छोड़ दिया उसके बाद उनके 3 सौतेले बेटो ने भी उन्हे घर से तब निकाल दिया जब उनको नौकरी से रिटायर कर दिया गया। वीणापाणी शुरुआत से ही आत्मनिर्भर रहीं थीं। उन्होंने 60 साल की उम्र तक एक निजी कंपनी के अलावा जनसंख्या विभाग से जुड़कर काम किया। जब उन्हे बेटों ने घर से निकाल दिया, तब उन्होने रिटायरमेंट के बाद मिले पैसों के अलावा कुछ कर्ज लेकर 1 लाख 45 हजार रूपए जुटाए और ई-रिक्शा खरीदा। शुरू में उन्होंने रिक्शा चलवाने के लिए ड्राइवर भी रखे लेकिन जब ड्राइवर काम छोड़ कर भागने लगे तो वीणापाणी ने खुद रिक्शा चलने का फैसला किया।


सफर इतना आसान नहीं रहा–

इस बुजुर्ग महिला ने भीषण गर्मी में भी सवारियों की तलाश की और लगातार रिक्शा दौड़ाते रहना उस बुजुर्ग महिला की आदत में शामिल हो गया। हालांकि ये सब इतना आसान नहीं था, लेकिन उन्हे अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं रही। वीणापाणी का इस उम्र में ये हौसला नौजवानों के लिये एक मिसाल है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे बेटों को सबक कब मिलेगा, जिन्होने अपने बुजुर्ग मां-बाप को बुढ़ापे में सहारा देने के बजाय दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया।

कहते हैं मां-बाप का साया अगर सिर पर हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। वो बचपन में हमें पढ़ाने-लिखाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं ताकि उनके बच्चों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। लेकिन जब वही बेटा बड़ा होकर बुजुर्ग मां-बाप की बुढ़ापे की लाठी बनने के बजाय दर-दर भटकने पर मजबूर कर दे, तो इससे शर्मनाक वाकया और कोई हो ही नहीं सकता। एक ऐसा ही मामला इलाहाबाद से सामने आया, जहां एक बेटे…