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सोनभद्र और मिर्जापुर में 660 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कब्जा, कई अफसरों पर गिरेगी गाज

660 Crore Worth Of Land Occupied In Sonbhadra And Mirzapur Questions Raised Over The Functioning Of Many Ias And Officers

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। सोनभद्र के उम्भा गांव में खूनी संघर्ष के बाद जागी यूपी सरकार ने मिर्जापुर और सोनभद्र की जमीनों के जांच के लिए रेणुका कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनायी थी। जांच टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुधवार देर रात अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जांच रिपोर्ट में चौकाने वाला मामला सामने आया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, सोनभद्र और मिर्जापुर में 6,602 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है, जिसकी कीमत 660 करोड़ रुपये है।
सोनभद्र और मिर्जापुर की कृषि सहकारी समितियों की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुधवार देर रात सौंप दी गई। जांच रिपोर्ट ने वहां तैनात रहे अफसरों की लापरवाही भी उजागर की है।

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जांच में बताया गया है कि दोनों जिलों में तैनात रहे कुछ जिलाधिकारियों ने घोर लापरवाही की है। साथ ही मिर्जापुर में एक तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को सीधे तौर पर इसके लिए दोषी माना गया है। जांच में राजस्व से जुड़े करीब 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को जमीन कब्जे के लिए दोषी माना गया है। बताया जा रहा हे कि, सीएम को जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही दोषी पाये गए सभी अफसरों पर गाज गिर सकती है। इसके साथ ही सरकार इन समितियों से जमीने वापस भी लेंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों जिलों में तैनात राजस्व अधिकारियों ने कदम दर कदम नियमों की अनदेखी की है।

इन अफसरों की घोर लापरवाही के चलते ही सरकारी जमीनों पर कब्जा होता रहा लेकिन इन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की है। जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। बता दें कि, जांच ​टीम ने करीब 1100 पेज की रिपोर्ट सीएम को सौंपी है। इसमें 500 पेज की रिपोर्ट है और 600 पेज इससे जुड़े रिकॉर्ड दिए गए हैं। जांच कमेटी ने वर्ष 1952 से लेकर 2019 तक की जांच की है। दोनों जिलों की कुल 39 सहकारी समितियों की जांच होनी थी, जिनमें से तीन का रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच के दौरान 12380 एकड़ जमीनों की जांच की गई।

सात समितियों ने किया खेल
अपर मुख्य सचिव राजस्व की अध्यक्षता में बनी जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि, सोनभद्र की तीन सहकारी समितियों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है। इसमें मेंसवार कृषि सहकारी समिति, पेढ कृषि सहकारी समिति और बरौधी कृषि सहकारी समिति शामिल हैं। वहीं, मिर्जापुर में गोपालपुर कृषि सहकारी समिति, बड़ोही कृषि सहकारी समिति, मेवाड़ी कृषि सहकारी समिति और पटेहरा कला कृषि सहकारी समिति ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। सूत्रों की माने तो गोपालपुर कृषि सहकारी समिति एक कद्दावर कांग्रेसी नेता से जुड़ी है।

रेणुका कुमार की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी
सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए खूनी संघर्ष के बाद यूपी सरकार ने जांच कराने का फैसला लिया था। 7 अगस्त 2019 को सोनभद्र और मिर्जापुर मामले की जांच के लिए रेणुका कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई। इस जांच टीम में प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा इसके सह अध्यक्ष बनाए गए थे। वहीं, रमेश पांडेय सीसीएफ वन विभाग, राम प्रकाश सिंह अपर निबंधक सहकारिता कृषि निवेश, राजेश कुमार कुलश्रेष्ठ उप निबंधक सहकारिता सदस्य और विशेष सचिव राजस्व सदस्य समन्वयक बनाए गए। जांच रिपोर्ट तीन महीने यानी नवंबर में दी जानी थी, लेकिन इसे चार महीने बाद सौंपा गया।

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