एक महीने में मारे गए 6700 रोहिंग्या मुसलमान, सरकारी आकड़ें गलत: रिपोर्ट

वैश्विक मानवतावादी गैर सरकारी संस्था मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर (एमएसएफ) ने गुरुवार को म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों की मौत के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया। इस रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार के रखाइन राज्य में विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पहले ही महीने में कम से कम 6,700 रोहिंग्या मुसलमान मारे गए थे। जिसमें करीब 730 बच्चे शामिल थे। यह आकड़ें वाकई बेहद ही भयावह हैं।

बांग्लादेश में शरणार्थियों के सर्वेक्षण के आधार पर यह संख्या म्यांमार की आधिकारिक संख्या 400 से काफी अधिक है। बता दें, म्यांमार ने रोहिंग्या मुसलमानों की मौत का आंकडा 400 बताया था जबकि एमएसएफ के सर्वे में रोहिंग्या मुसलमानों की मौत का आंकडा 6700 से अधिक है। इससे साबित होता है कि दुनिया के सामने म्यांमार मे रोहिंग्या की मौत का आंकड़ा कम दिया था। जबकि हकीकत में काफी ज्यादा है।

{ यह भी पढ़ें:- रोहिंग्या मुसलमानों की याचिका पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट }

एमएसएफ ने रिपोर्ट में कहा, ‘सबसे रूढि़वादी अनुमानों में, हिंसा के कारण कम से कम 6,700 लोगों की मौत हुई है जिसमें 5 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या कम से कम 730 है।’ एमएसएफ को बिना सीमाओं के डॉक्टरों के रूप में जाना जाता है। संस्था ने कहा कि यह म्यांमार अधिकारियों द्वारा व्यापक हिंसा के स्पष्ट संकेत हैं। एमएसएफ मेडिकल निदेशक सिडनी वोंग ने कहा, ‘जो कुछ भी हमने पाया वह चौंका देने वाला था, लोगों की संख्या में संदर्भ में परिवारों ने माना है कि हिंसा के कारण उनके सदस्यों की मौत हुई, उन्होंने कहा कि हिंसा में उनके सदस्यों की भयावह तरीके से मृत्यु हुई या वे गंभीर रूप से घायल हो गए।’

इस रिपोर्ट से साबित होता है कि म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ व्यापक स्तर पर हिंसा की है। एमएसएफ के मेडिकल डायरेक्टर के मुताबिक हमें म्यांमार में हुई हिंसा के बारे में जो पता चला है वो काफी चौंका देने वाला था, भयावह तरीके से लोग मारे गए व बड़ी संख्या में गंभीर रूप से घायल भी हुए। रोहिंग्या के साथ यौन उत्पीड़न व अत्याचार भी किए गए।

{ यह भी पढ़ें:- रोहिंग्या शणार्थी नहीं अवैध प्रवासी: राजनाथ सिंह }

Loading...