दूध नहीं जहर पी रहे देश के बच्चे, खपत से 68 फीसदी कम है दूध का उत्पादन

milawti milk
दूध नहीं जहर पी रहे देश के बच्चे, खपत से 68 फीसदी कम है दूध का उत्पादन

68 Percent Milk Products In India Is Not Standered According To Fssai

नई दिल्ली। भारत में रोजाना करीब 64 करोड़ लीटर की खपत है, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि देश में दूध का कुल उत्पादन मात्र 14 करोड़ लीटर ही है। ऐसे में सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि देश में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक दूध ही बेंचा जा रहा हैं। जो बड़ो से लेकर बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है।

एनीमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है। यह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों से कहीं भी मेल नहीं खाता है। इसके बाद भी देश में धड़ल्ले से दूध और उससे बने प्रोडक्ट बिक रहे है और सरकार चुप्पी साधे हुए है। देश के बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रही है ये कंपनियां भी देशवासियों के सेहत से खिलवाड़ करने में बाज नहीं आ रही है।

साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के एक बयान का हवाला देते हुए अहलूवालिया ने कहा कि मिलावट वाले करीब 89 फीसदी प्रोडक्ट में एक या दो तरह की मिलावट होती है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2018 देश में दूध का कुल उत्पादन 14.68 करोड़ लीटर रोजाना रिकॉर्ड किया गया, जबकि देश में दूध की प्रति व्यक्ति खपत 480 ग्राम प्रति दिन ठहरती है। सीधे तौर पर यह गैप करीब 68 फीसदी का ठहरता है।

उत्तरी राज्यों में होती है ज्यादा मिलावट

अहलूवालिया के मुताबिक, दक्षिणी राज्यों की अपेक्षा उत्तरी राज्यों में दूध में मिलावट के ज्यादा मामले सामने आए हैं। दो साल पहले दूध में मिलावट को लेकर एक सर्वे में हुआ है। सर्वें में पाया गया ​कि मिलावट के साथ ही दूध की पैकिंग के वक्त सफाई और स्वच्छता दोनों से खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होने बताया कि दूध में डिटर्जेंट की सीधे तौर पर मिलावट पाई गई है, जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर यही आलम रहा है कि आगामी 2025 तक देश में 87 प्रतिशत लोग कैंसर से पीड़ित हो जाएंगे।

नई दिल्ली। भारत में रोजाना करीब 64 करोड़ लीटर की खपत है, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि देश में दूध का कुल उत्पादन मात्र 14 करोड़ लीटर ही है। ऐसे में सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि देश में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक दूध ही बेंचा जा रहा हैं। जो बड़ो से लेकर बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है। एनीमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी…