डूबने की कगार पर पहुंची 70 कंपनियां, RBI की तय सीम हो रही है खत्म

डूबने की कगार पर पहुंची 70 कंपनियां, RBI की तय सीम हो रही है खत्म
डूबने की कगार पर पहुंची 70 कंपनियां, RBI की तय सीम हो रही है खत्म

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मुंबई। देशभर के 70 बड़ी कंपनियों का भविष्य अधर में है। इन कंपनियों पर बैंकों का करीब 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 अगस्त की समयसीमा तय की थी, जो करीब आ गई है। अगर सोमवार तक बैंक इसके बारे में कोई समाधान योजना पेश नहीं करते हैं। तो फिर उन पर एनसीएलटी यानि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया घोषित करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा।

आरबीआई ने संकटग्रस्त एसेट के समाधान के लिए 12 फरवरी को नए दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनके तहत बैंकों को 180 दिन के भीतर अपनी योजना को अंतिम रुप देना है। 2,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि के बड़े डिफॉल्टर खातों के लिए यह नियम एक मार्च 2018 से लागू हुआ।

अगर बैंक 180 दिन के भीतर समाधान योजना पेश करने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें डिफॉल्ट खातों के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इनमें 34 खाते केवल बिजली क्षेत्र के हैं जिनमें बैंकों के 2 लाख करोड़ रुपये फंसे हैं। वैसे 3.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज वाले एसेट में से करीब 92 फीसदी को बैंक पहले की एनपीए की श्रेणी में डाल चुके हैं।

12 फरवरी को RBI की ओर से जारी सर्कुलर का बैंकों पर दोहरा असर पड़ा। पहला असर मार्च 2018 में बैंकों के तिमाही नतीजे पर दिखा। चूंकि, RBI सभी लोन रिस्ट्रक्चरिंग योजनाओं को खत्म कर चुका है, चौथी तिमाही में कुल नुकसान 2.42 लाख करोड़ रुपये रहा। परिणामस्वरूप NPA का स्टॉक 1.2 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 10.4 लाख करोड़ हो गया।

मुंबई। देशभर के 70 बड़ी कंपनियों का भविष्य अधर में है। इन कंपनियों पर बैंकों का करीब 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 अगस्त की समयसीमा तय की थी, जो करीब आ गई है। अगर सोमवार तक बैंक इसके बारे में कोई समाधान योजना पेश नहीं करते हैं। तो फिर उन पर एनसीएलटी यानि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया घोषित करने के अलावा कोई चारा…