74 साल की महिला ने जुड़वा बच्चियों को दिया जन्‍म, जानें पूरा मामला

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74 साल उम्र की महिला ने जुड़वा बच्चियों को दिया जन्‍म, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली। वो कहते है दुनिया में कुछ भी हो सकता है। ऐसा ही एक मामला आंध्र प्रदेश के ईस्‍ट गोदावरी जिले के एक गांव से आया है जहां एक 74 साल उम्र की महिला मंगायम्‍मा शायद सबसे अधिक उम्र में मां बनने वाली महिला बन गई हैं। गुरुवार को उन्‍होंने गुंटूर के एक प्राइवेट अस्‍पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्‍म दिया। मंगायम्‍मा की 57 साल पहले एक किसान से शादी हुई थी, उन्‍होंने आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भ धारण किया था। चार डॉक्‍टरों की टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए इन जुड़वां बच्‍चों की डिलिवरी की। लेकिन अब मेडिकल बिरादरी में यह बहस चालू हो गई है कि क्‍या डॉक्‍टरों को इतनी उम्र में मां बनने की चाहत पूरी करने को बढ़ावा देना चाहिए।

74 Year Old Woman Gives Birth To Twin Girls Know The Whole Matter :

दरअसल, नेलापार्थीपुड़ी गांव के यारामती सीताराम राजाराव की शादी मंगायम्‍मा से 1962 में हुई थी। तमाम डॉक्‍टरों से मिलने, मंदिरों में मन्‍नतें मांगने के बाद भी दोनों को कोई संतान नहीं हुई। मंगायम्‍मा कहती हैं कि इतने बरसों नि:संतान रहना उनके लिए बहुत बड़ा बोझ था। हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए उन्‍होंने कहा, ‘लोग मुझे ऐसी नजरों से देखते थे कि जैसे मैंने कोई अपराध कर दिया हो। पड़ोसी मुझे अपमानसूचक शब्‍द कहते थे। लेकिन मेरे पति दृढ़ता से मेरे साथ खड़े रहे।’ वहीं मंगायम्‍मा के पति राजाराव कहते हैं, ‘आज हम दुनिया के सबसे खुशनसीब दंपती हैं। हमारे अपने बच्‍चे हैं।’ उन्‍हें पूरा भरोसा है कि वे इन दोनों बच्चियों की अच्‍छी परवरिश कर पाएंगे।

वहीं, दोनों माता-पिता बनने की सभी उम्‍मीदें छोड़ चुके थे लेकिन फिर इनकी मुलाकात एक साल पहले आईवीएफ एक्‍सपर्ट डॉ. सनाक्‍कयाला उमाशंकर से हुई। डॉ. उमाशंकर ने इलाज शुरू करने से पहले इस केस पर विचार के लिए पहले हृदय रोग विशेषज्ञों, महिला रोग विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया। डॉक्‍टर इस नतीजे पर पहुंचे कि चूंकि मंगायम्‍मा मेनोपॉज की उम्र पार कर चुकी हैं इसलिए आईवीएफ तकनीक का इस्‍तेमाल करना होगा। डॉ. उमाशंकर ने बताया, ‘मरीज के साथ किए गए गोपनीयता के करार की वजह से हम सारा ब्यौरा नहीं दे सकते, लेकिन हमने सभी नियमों का पालन किया है।’

बता दें, मंगायम्‍मा ने आईवीएफ की पहली साइकल में ही गर्भधारण कर लिया था। इसके बाद उन्‍हें जनवरी में अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, तब से वह लगातार डॉक्‍टरों की निगरानी में थीं। मंगायम्‍मा की अच्‍छी शारीरिक स्थिति की वजह से डॉक्‍टरों का काम और आसान हो गया। इसके अलावा उनकी कई बार मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी कई गई ताकि वह मानसिक तौर पर भी मजबूत बनी रहें।

इतना ही नहीं, डॉ. उमाशंकर ने जानकारी दी कि ‘मां और बच्चियां दोनों ही स्‍वस्‍थ हैं। दस डॉक्‍टर नौ महीनों से इनकी सेहत पर नजर रखे हुए थे। मेडिकल के क्षेत्र में यह एक चमत्‍कार है।’ अस्‍पताल में मिठाई बांटने के बाद राजाराव कहते हैं, ‘भगवान की कृपा और डॉक्‍टरों की वजह से मैं दो लड़कियों का पिता बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं।’ मंगायम्‍मा भी कहती हैं, ‘मैं बहुत खुश हूं। 54 साल बाद आखिर भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली।’

नई दिल्ली। वो कहते है दुनिया में कुछ भी हो सकता है। ऐसा ही एक मामला आंध्र प्रदेश के ईस्‍ट गोदावरी जिले के एक गांव से आया है जहां एक 74 साल उम्र की महिला मंगायम्‍मा शायद सबसे अधिक उम्र में मां बनने वाली महिला बन गई हैं। गुरुवार को उन्‍होंने गुंटूर के एक प्राइवेट अस्‍पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्‍म दिया। मंगायम्‍मा की 57 साल पहले एक किसान से शादी हुई थी, उन्‍होंने आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भ धारण किया था। चार डॉक्‍टरों की टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए इन जुड़वां बच्‍चों की डिलिवरी की। लेकिन अब मेडिकल बिरादरी में यह बहस चालू हो गई है कि क्‍या डॉक्‍टरों को इतनी उम्र में मां बनने की चाहत पूरी करने को बढ़ावा देना चाहिए। दरअसल, नेलापार्थीपुड़ी गांव के यारामती सीताराम राजाराव की शादी मंगायम्‍मा से 1962 में हुई थी। तमाम डॉक्‍टरों से मिलने, मंदिरों में मन्‍नतें मांगने के बाद भी दोनों को कोई संतान नहीं हुई। मंगायम्‍मा कहती हैं कि इतने बरसों नि:संतान रहना उनके लिए बहुत बड़ा बोझ था। हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए उन्‍होंने कहा, 'लोग मुझे ऐसी नजरों से देखते थे कि जैसे मैंने कोई अपराध कर दिया हो। पड़ोसी मुझे अपमानसूचक शब्‍द कहते थे। लेकिन मेरे पति दृढ़ता से मेरे साथ खड़े रहे।' वहीं मंगायम्‍मा के पति राजाराव कहते हैं, 'आज हम दुनिया के सबसे खुशनसीब दंपती हैं। हमारे अपने बच्‍चे हैं।' उन्‍हें पूरा भरोसा है कि वे इन दोनों बच्चियों की अच्‍छी परवरिश कर पाएंगे। वहीं, दोनों माता-पिता बनने की सभी उम्‍मीदें छोड़ चुके थे लेकिन फिर इनकी मुलाकात एक साल पहले आईवीएफ एक्‍सपर्ट डॉ. सनाक्‍कयाला उमाशंकर से हुई। डॉ. उमाशंकर ने इलाज शुरू करने से पहले इस केस पर विचार के लिए पहले हृदय रोग विशेषज्ञों, महिला रोग विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया। डॉक्‍टर इस नतीजे पर पहुंचे कि चूंकि मंगायम्‍मा मेनोपॉज की उम्र पार कर चुकी हैं इसलिए आईवीएफ तकनीक का इस्‍तेमाल करना होगा। डॉ. उमाशंकर ने बताया, 'मरीज के साथ किए गए गोपनीयता के करार की वजह से हम सारा ब्यौरा नहीं दे सकते, लेकिन हमने सभी नियमों का पालन किया है।' बता दें, मंगायम्‍मा ने आईवीएफ की पहली साइकल में ही गर्भधारण कर लिया था। इसके बाद उन्‍हें जनवरी में अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, तब से वह लगातार डॉक्‍टरों की निगरानी में थीं। मंगायम्‍मा की अच्‍छी शारीरिक स्थिति की वजह से डॉक्‍टरों का काम और आसान हो गया। इसके अलावा उनकी कई बार मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी कई गई ताकि वह मानसिक तौर पर भी मजबूत बनी रहें। इतना ही नहीं, डॉ. उमाशंकर ने जानकारी दी कि 'मां और बच्चियां दोनों ही स्‍वस्‍थ हैं। दस डॉक्‍टर नौ महीनों से इनकी सेहत पर नजर रखे हुए थे। मेडिकल के क्षेत्र में यह एक चमत्‍कार है।' अस्‍पताल में मिठाई बांटने के बाद राजाराव कहते हैं, 'भगवान की कृपा और डॉक्‍टरों की वजह से मैं दो लड़कियों का पिता बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं।' मंगायम्‍मा भी कहती हैं, 'मैं बहुत खुश हूं। 54 साल बाद आखिर भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली।'