सेल्फ फाइनेंस कोर्स के नाम पर 80 करोड़ का फीस घोटाला, जांच के आदेश

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सेल्फ फाइनेंस कोर्स के नाम पर 80 करोड़ का फीस घोटाला, जांच के आदेश

लखनऊ। विकास भवन व लखनऊ विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मिली भगत से सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस के नाम पर 80 करोड़ रूपए के घोटाले का मामला सामने आया है। इस घोटाले में विश्वविद्यालय के साथ ही 165 कालेजों की भी झोली भरी गई है। मामला संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए है।

80 Crore Fees Fraud In Self Finance Course Probe Orderd :

बता दें कि निजी संस्थानों में संचालित होने वाले सेल्फ फाइनेंस कोर्सेस में कितनी फीस ​ली जाएगी, इसका निर्धारण शासन करता है। फीस तय होने तक नियंमित पाठयक्रम की तरह शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय व और सम्बंधित विभाग के अधिकारियों ने इससे में हेराफेरी कर कई गुना ज्यादा फीस का भुगतान करवा दिया।

आपको बता दे कि अधिकारियों की इस कारगुजारी से विभाग को सिर्फ एक सत्र में ही करीब 25 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने जब यहां ज्वाइन किया तो उन्हे इस खेल की जानकारी हुई। इतने बड़े घोटाले की जानकारी होते ही उनके होश उड़ तो उन्होने इसकी सूचना तुरन्त जिलाधिका​री कौशल राज शर्मा को दी। डीएम ने समिति गठित कर मामले की जांच कराई। घोटाला उजागर होने के बाद डीएम ने पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मामले से अवगत कराया।

स़ूत्रों की मानें तो फीस के नाम पर ये गड़बड़झाला बीते कई वर्षों से चल रहा हैं। जिसमें विकास भवन के अधिकारियों ने सारे नियम कानून ताक पर रखकर निजी कालेजों को करोड़ों रूपए का भुगतान कर कर दिया। बाद में इस घोटाले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हुई तो उन्होने इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा को मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। जानकारों की मानें तो अब तक लखनऊ विश्वविद्यालय व विकासभवन के अधिकारियों ने करीब 80 करोड़ रूपए का हेरफेर किया है।

लखनऊ। विकास भवन व लखनऊ विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मिली भगत से सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस के नाम पर 80 करोड़ रूपए के घोटाले का मामला सामने आया है। इस घोटाले में विश्वविद्यालय के साथ ही 165 कालेजों की भी झोली भरी गई है। मामला संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए है।बता दें कि निजी संस्थानों में संचालित होने वाले सेल्फ फाइनेंस कोर्सेस में कितनी फीस ​ली जाएगी, इसका निर्धारण शासन करता है। फीस तय होने तक नियंमित पाठयक्रम की तरह शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय व और सम्बंधित विभाग के अधिकारियों ने इससे में हेराफेरी कर कई गुना ज्यादा फीस का भुगतान करवा दिया।आपको बता दे कि अधिकारियों की इस कारगुजारी से विभाग को सिर्फ एक सत्र में ही करीब 25 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने जब यहां ज्वाइन किया तो उन्हे इस खेल की जानकारी हुई। इतने बड़े घोटाले की जानकारी होते ही उनके होश उड़ तो उन्होने इसकी सूचना तुरन्त जिलाधिका​री कौशल राज शर्मा को दी। डीएम ने समिति गठित कर मामले की जांच कराई। घोटाला उजागर होने के बाद डीएम ने पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मामले से अवगत कराया।स़ूत्रों की मानें तो फीस के नाम पर ये गड़बड़झाला बीते कई वर्षों से चल रहा हैं। जिसमें विकास भवन के अधिकारियों ने सारे नियम कानून ताक पर रखकर निजी कालेजों को करोड़ों रूपए का भुगतान कर कर दिया। बाद में इस घोटाले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हुई तो उन्होने इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा को मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। जानकारों की मानें तो अब तक लखनऊ विश्वविद्यालय व विकासभवन के अधिकारियों ने करीब 80 करोड़ रूपए का हेरफेर किया है।