भारत का एक ऐसा डॉक्टर जिसने इलाज को हल करने के साथ सीखा पैसा बनाने का हुनर

dr. jagdish chaturvedi
भारत का एक ऐसा डॉक्टर जिसने इलाज को हल करने के साथ, सीखा पैसा बनाने का हुनर

लखनऊ। एक डॉक्टर जहां लोगों की सेवा करने के साथ -साथ अगर अपने तेज़ दिमाग का इस्तेमाल करते हुए एक बिजनेस करने की सोचें तो वाकई उसका ध्यान सेवा के काम से हटकर बिज़नेस की तरफ ही दौड़ेगा। एक ऐसे ही जीता जागते मिसाल है भारत के बेंगलुरु में रहने वाले डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी जिन्होंने साल 2010 से 2018 के बीच मेडिकल उपकरणों को तैयार करने में खास भूमिका निभाई है। आइये जानते हैं उनका इलाज से ध्यान हटकर मेडिकल उपकरणों को बनाने का इरादा कैसे और क्यों आया।

A Doctor Of India Who Along With Solving The Cure Learned To Make Money :

डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी असल में एक Co-inventor यानी सह-आविष्कारकर्ता है। साथ ही आज वो एक ENT स्पेशलिस्ट (आंख, नाक और गले का डॉक्टर) हैं। डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी ने अपनी किताब ‘इन्वेंटिंग मेडिकल डिवाइसेज- अ पर्सपेक्टिव फ़्रॉम इंडिया’ में इस बात का ज़िक्र करते हैं कि हम मरीज़ों की जांच के लिए लंबे शीशे और हेड लैंप का इस्तेमाल कर रहे थे जबकि मेरे अस्पताल में फ़्लैट स्क्रीन वाली टीवी और कहीं आधुनिक टेक्नॉलॉजी मौजूद थी।”

जिसके बाद वो एक आधुनिक टेक्नॉलॉजी के उपकरण को जानने के लिए परेशान हो गए। मगर इस परेशानी में उन्हें एक आइडिया आया कि एक ऐसा ENT इंडोस्कोप बनाया जाए जिसमें डिजिटल कैमरा भी लगा हो। मगर ENT इंडोस्कोप बनाना उनके लिए आसान नहीं था, उनको एहसास था कि डॉक्टर होने के साथ-साथ एक उद्यमी बनना बेहद मुश्किल है। मगर डाक्टर जगदीश ने आधुनिक टेक्नॉलॉजी वाला ENT इंडोस्कोप बनाने कि सोच ली थी जिसके लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया और एक डिजाइन फ़र्म को ENT इंडोस्कोप का लाइसेंस दे दिया।

इस काम में डाक्टर जगदीश को उनके अस्पताल के ENT विभाग के दूसरे सीनियर डॉक्टरों का भी पूरा साथ मिला। क्योंकि वो ट्रेनिंग के दौरान निवेशकों से मिलने के सिलसिले में अस्पताल की ट्रेनिंग मिस करते थे तो उनकी ग़ैरमौजूदगी में उनके सहयोगी डॉक्टरों को उनके काम की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती थी। जिसे लेकर उनके साथी डॉक्टरों के बीच ख़ासा नाराज़गी चलने लगी थी।

ईएनटी इंडोस्कोप पर जब डॉक्टर चतुर्वेदी का काम चल रहा था तो उसी दौरान उन्होंने अमरीका के स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में बायोडिज़ाइन की पढ़ाई के लिए भी आवेदन कर दिया था जिसके लिए उन्हें भारत सरकार से वजीफा भी मिला। जिसके बाद वो पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए।

बायोडिज़ाइन की पढ़ाई पूरी कर जब डाक्टर अमेरिका से वापस लौटे तो उन्होंने आगे चलकर डिजिटल कैमरा वाला ENT इंडोस्कोप साल 2015 में लॉन्च किया। बाद में डाक्टर जगदीश चतुर्वेदी ने एक कंपनी की शुरुआत की जिसका इरादा बाज़ार में ज़्यादा से मेडिकल उपकरण लाने का था। वे ऐसी मशीन बनाना चाहते थे जो साइनस के इन्फ़ेक्शन में मदद करे।

इसके अलावा उन्होंने कई उपकरणों को लॉंच किया। इसके साथ उन्होंने इनोवेशन इंडस्ट्री को भी लॉंच किया। जहां लोग नए उपकरणों को तैयार करने के माध्यम से भारतीय डॉक्टरों को एक-दूसरे के साथ जोड़े रखे।

मेडिकल उपकरणों बनाने को लेकर डाक्टर जगदीश का कहना है कि ये मशीनें भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद करने के इरादे से तैयार की गई हैं। मैं उस पीढ़ी के पेशेवर लोगों में से हूं जो उस जमात से आते हैं, जो कामकाज में आने वाली परेशानियों को हल करने साथ-साथ उससे पैसा बनाने का हुनर भी जानता हूं।

लखनऊ। एक डॉक्टर जहां लोगों की सेवा करने के साथ -साथ अगर अपने तेज़ दिमाग का इस्तेमाल करते हुए एक बिजनेस करने की सोचें तो वाकई उसका ध्यान सेवा के काम से हटकर बिज़नेस की तरफ ही दौड़ेगा। एक ऐसे ही जीता जागते मिसाल है भारत के बेंगलुरु में रहने वाले डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी जिन्होंने साल 2010 से 2018 के बीच मेडिकल उपकरणों को तैयार करने में खास भूमिका निभाई है। आइये जानते हैं उनका इलाज से ध्यान हटकर मेडिकल उपकरणों को बनाने का इरादा कैसे और क्यों आया। डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी असल में एक Co-inventor यानी सह-आविष्कारकर्ता है। साथ ही आज वो एक ENT स्पेशलिस्ट (आंख, नाक और गले का डॉक्टर) हैं। डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी ने अपनी किताब 'इन्वेंटिंग मेडिकल डिवाइसेज- अ पर्सपेक्टिव फ़्रॉम इंडिया' में इस बात का ज़िक्र करते हैं कि हम मरीज़ों की जांच के लिए लंबे शीशे और हेड लैंप का इस्तेमाल कर रहे थे जबकि मेरे अस्पताल में फ़्लैट स्क्रीन वाली टीवी और कहीं आधुनिक टेक्नॉलॉजी मौजूद थी।" https://twitter.com/DrJagdishChatur/status/1105788414949900288 जिसके बाद वो एक आधुनिक टेक्नॉलॉजी के उपकरण को जानने के लिए परेशान हो गए। मगर इस परेशानी में उन्हें एक आइडिया आया कि एक ऐसा ENT इंडोस्कोप बनाया जाए जिसमें डिजिटल कैमरा भी लगा हो। मगर ENT इंडोस्कोप बनाना उनके लिए आसान नहीं था, उनको एहसास था कि डॉक्टर होने के साथ-साथ एक उद्यमी बनना बेहद मुश्किल है। मगर डाक्टर जगदीश ने आधुनिक टेक्नॉलॉजी वाला ENT इंडोस्कोप बनाने कि सोच ली थी जिसके लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया और एक डिजाइन फ़र्म को ENT इंडोस्कोप का लाइसेंस दे दिया। इस काम में डाक्टर जगदीश को उनके अस्पताल के ENT विभाग के दूसरे सीनियर डॉक्टरों का भी पूरा साथ मिला। क्योंकि वो ट्रेनिंग के दौरान निवेशकों से मिलने के सिलसिले में अस्पताल की ट्रेनिंग मिस करते थे तो उनकी ग़ैरमौजूदगी में उनके सहयोगी डॉक्टरों को उनके काम की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती थी। जिसे लेकर उनके साथी डॉक्टरों के बीच ख़ासा नाराज़गी चलने लगी थी। https://twitter.com/DrJagdishChatur/status/1110158403081510912 ईएनटी इंडोस्कोप पर जब डॉक्टर चतुर्वेदी का काम चल रहा था तो उसी दौरान उन्होंने अमरीका के स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में बायोडिज़ाइन की पढ़ाई के लिए भी आवेदन कर दिया था जिसके लिए उन्हें भारत सरकार से वजीफा भी मिला। जिसके बाद वो पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। बायोडिज़ाइन की पढ़ाई पूरी कर जब डाक्टर अमेरिका से वापस लौटे तो उन्होंने आगे चलकर डिजिटल कैमरा वाला ENT इंडोस्कोप साल 2015 में लॉन्च किया। बाद में डाक्टर जगदीश चतुर्वेदी ने एक कंपनी की शुरुआत की जिसका इरादा बाज़ार में ज़्यादा से मेडिकल उपकरण लाने का था। वे ऐसी मशीन बनाना चाहते थे जो साइनस के इन्फ़ेक्शन में मदद करे। https://twitter.com/DrJagdishChatur/status/1128256759250821121 इसके अलावा उन्होंने कई उपकरणों को लॉंच किया। इसके साथ उन्होंने इनोवेशन इंडस्ट्री को भी लॉंच किया। जहां लोग नए उपकरणों को तैयार करने के माध्यम से भारतीय डॉक्टरों को एक-दूसरे के साथ जोड़े रखे। मेडिकल उपकरणों बनाने को लेकर डाक्टर जगदीश का कहना है कि ये मशीनें भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद करने के इरादे से तैयार की गई हैं। मैं उस पीढ़ी के पेशेवर लोगों में से हूं जो उस जमात से आते हैं, जो कामकाज में आने वाली परेशानियों को हल करने साथ-साथ उससे पैसा बनाने का हुनर भी जानता हूं।