आज ही के दिन खेला गया था धर्म की नगरी मथुरा के जवाहरबाग में खूनी खेल

मथुरा। धर्म की नगरी कहे जाने वाले मथुरा पर आज के ही दिन एक ऐसा दाग लग गया था जो मथुरा के इतिहास में सबसे काला दिन माना जाएगा। आज के ही दिन मथुरा में सत्याग्रह के नाम पर एक खूनी खेल खेला गया था जिसमे मथुरा एसपी व थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। इस सनसनीखेज वारदात के पीछे एक ऐसे अधेड़ मास्टरमाइंड का हाथ था जिसने एक ही रात में पूरी प्रशासनिक अमले की नाक में दम कर दिया।



क्या था खूनी खेल
रामवृक्ष यादव नामक इस अधेड़ युवक ने अपने दल-बल के साथ मथुरा के जवाहरबाग में आंदोलन किया जिसके बाद से इसने अपने साथियों के साथ यहां अपना डेरा जमा लिया। कहा जाता है कि रामवृक्ष को तत्कालीन सरकार के एक बड़े सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त था। बताया जाता है कि जब भी प्रशासन खाली कराने की के लिए जाता तो रामवृक्ष बच्चे, बूढ़े, महिला, और असहाय लोगों को पुलिस के आगे कर देता था जिसके चलते प्रशासन को हर बार मुंह की खानी पड़ती थी।




लेकिन 2 जून 2016 को जिला प्रशासन ने दोपहर 12:00 बजे मथुरा पुलिस लाइन में एक प्रेसवार्ता बुलाई। जिसमें जवाहरबाग से कब्जे को हटाने की बात बताई गई। करीब 3:00 बजे जिला प्रशासन सैकड़ों की संख्या में पुलिस फोर्स के साथ जवाहर बाग खाली कराने पहुंचा। जैसे ही पुलिस अंदर घुसी पहले से ही घाट लगाए बैठे रामवृक्ष यादव के हजारों गुर्गों ने पुलिस के ऊपर धावा बोल दिया। इसमें मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष कुमार यादव की मौत हो गई।



{ यह भी पढ़ें:- हर मुसलमान का इस्लाम की शिक्षा पर अमल करना फर्ज: कुमैली }

बता दें कि पुलिसकर्मियों से लेकर स्थानीय लोगों से भी सीबीआई पूछताछ कर रही है। सीबीआई ने अब तक 200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। मथुरा जिला कारागार में जवाहर बाग के आरोपी सैकड़ों की संख्या में बंद हैं वहीं जिला कारागार में जवाहरबाग कांड के दोषी दो कैदियों की भी मौत हो गई थी। जबकि आगरा, अलीगढ़ और हाथरस जिला कारागार में जवाहर बाग के आरोपी बंद हैं। जवाहर बाग के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव सरकारी जमीन खाली कराते समय मारा गया। लेकिन अभी तक कोई इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई क्योंकि जिला जज के कोर्ट में रामवृक्ष सहित 13 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट है।




DNA जांच के बाद भी नहीं उठा रहस्य से पर्दा

रामवृक्ष यादव मर गया है या ज़िंदा है इस पर आज भी रहस्य बना हुआ है हालांकि मथुरा पुलिस का दावा है कि इस खूनी खेल का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत घटना स्थल पर ही हो गयी थी। लेकिन जिस शव की पुष्टि की गयी थी वो किसी और की निकली। जिसके बाद कोर्ट के आदेश के बाद रामवृक्ष के DNA को इनके दोनों बेटों से मिलाया गया जो फेल हो गया। साथ ही जितने भी सत्याग्रही हैं वह भी अभी रामवृक्ष यादव को जिंदा बताते हैं।

Loading...