आपदा के खतरे की जद में आधी आबादी : राजनाथ

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को आपदा के खतरे के लिहाज से दुनिया के सर्वाधिक संवेदनशील देशों में शुमार बताते हुए कहा है कि देश की लगभग आधी आबादी आपदा के खतरों से घिरे इलाकों में रहती है। सिंह ने यहां राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक के उद्घाटन संबोधन में कहा कि सरकार ने देश भर में आपदा के खतरे को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच (एनपीडीआरआर) का गठन किया है। इसका काम देश के विभिन्न इलाकों में आपदा के खतरे को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से साझा रणनीति बनाना है।




उन्होंने कहा, ‘‘भारत प्राकृतिक एवं अन्य प्रकार की आपदाओं के लिहाज से दुनिया में सर्वाधिक खतरों से घिरा देश है। देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी भूकंप, बाढ़, चक्र वाती तूफान, सूखा और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के खतरों से घिरे इलाकों में रहती है। ऐसे में एनपीडीआरआर इन आपदाओं के खतरे को प्रभावी रूप से कम करने में मददगार साबित होगा।’ बैठक में गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू, विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री डा. हर्षवर्धन और केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सिंह ने कहा कि भारत ने साल 1999 में ओडिशा में आए भीषण चकवाती तूफान, साल 2001 में गुजरात में भूकंप और साल 2004 में सुनामी के कटु अनुभवों से प्राकृतिक आपदा के खतरों से निपटने की दिशा में काफी कुछ सीखा है। इसके मद्देनजर हम आपदा के खतरे से निपटने और इसे कम करने के उपायों को प्रभावी तौर से लागू करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। इसमें आपदा प्रबंधन कानून 2005 बनाना, साल 2009 में आपदा प्रबंधन नीति बनाना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रि या बल का गठन सहित अन्य कदम शामिल हैं।




इस कड़ी में केंद्र एवं राज्य सरकारों ने आपदा प्रतिक्रि या बल का गठन किया है। साथ ही आपदा की पूर्व चेतावनी पण्राली का विकास और जनता को जागरूक करने जैसे उपाय शामिल हैं। सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है जिसने आपदा के दौरान खाद्यान्न के भंडारण और इसके संरक्षण का प्रबंधन किया है। इसके अलावा भारत ने आपदा के खतरे को कम करने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के साथ भी आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया है। इसके लिए दक्षिण एशियाई संगठनों ब्रिक्स, बिम्सटेक और पूर्वी एशियाई देशों के साथ आपसी सहयोग को बढ़ाया गया है।