अब शायद ‘मिताली सेना’ को मिल जाए उनकी असली पहचान!

नई दिल्ली। देश वैसे तो हमेशा से ही महिलाओं को पुरुषों के समान सामाजिक हक दिये जाने का पक्षधर रहा है लेकिन वास्तव में देखें तो यह बात बहुत कम जगह ही अमल होता है। खास कर के खेल के क्षेत्र में महिलाओं को उनकी काबिलियत के हिसाब से न्याय नहीं मिल पाता। लेकिन जब देश की कोई महिला खिलाड़ी अपनी खेल से देश का नाम रोशन करती हैं तो उसके नाम का डंका पूरे देश में एक साथ बजने लगता है, रातों रात लोगों का नज़रिया महिला खिलाड़ियों के लिए आम से खास बन जाता है। चाहे हम ओलोंपिक के पन्नों को उठा कर देख ले या हालिया में सम्पन्न हुई आईसीसी महिला विश्व कप के फाइनल मैच को। फाइनल मैच की बात करे तो इस मैच से पहले तक हम उन खिलाड़ियों को पहचाना तो दूर, जानने की जहमत तक नहीं उठाते थे लेकिन इन्होने अपनी कारगुजरी से अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। फाइनल में पहुंचकर इन महिलाओं ने देश को यह बात मनवाने पर मजबूर किया। देश को अपनी बेटियों पर नाज़ न करने के लिए शर्मिंदा किया। सोशल मीडिया समेत तमाम अखबारों और टीवी चैनलों को मजबूर किया कि वे उनकी भी खबरों को प्राथमिकता दें।

भले ही फाइनल में पहुंचकर भारतीय बेटियां मैच हार गयी लेकिन असलियत यही है कि उन्होने अपनी एक नई पहचान बना ली है। इस बात की उम्मीद इन खिलाड़ियों के बीच भी जग गयी है कि शायद अब उन्हें उनकी काबिलियत के हिसाब से पहचान मिल गयी है लेकिन इसमे भी शायद लगा हुआ है क्योकि इन्हें समाज की अवसरवादी सोच के बारे में पता है। इन्हें यह पता है कि विराट सेना के निराश करने के बाद देश को अपनी बेटियों से उम्मीद जग गयी। इन सब के बीच टीम की कप्तान मिताली राज का भी मानना है कि इस विश्व कप में टीम ने जिस तरह का प्रदर्शन करते हुए दूसरी बार फाइनल में जगह बनाई उससे भारत में महिला क्रिकेट की स्थिति बेहतर होगी और खिलाड़ियों को वाजिब तवज्जो मिलेगी।

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बताते चलें कि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स मैदान पर भारत के सामने 229 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे भारतीय टीम हासिल नहीं कर पाई और 48.4 ओवरों में 219 रन पर अपने सभी विकेट गंवा बैठी। इस तरह उसके हाथ से पहली बार विश्व विजेता बनने दूसरा मौका चला गया। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नताली स्काइवर के 51 रन और सारा टेलर के 45 रनों की मदद से निर्धारित 50 ओवरों में सात विकेट खोकर 228 रन बनाए थे। मैच के बाद मिताली ने अपनी टीम की तारीफ की और कहा कि उन्हें अपनी टीम पर गर्व है।

मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मिताली ने कहा कि इंग्लैंड के लिए यह आसान नहीं था, लेकिन उन्हें जीत का श्रेय जाता है। उन्होंने दबाव के पलों में अच्छा प्रदर्शन किया और मैच पलट दिया। मैं अपनी टीम की खिलाड़ियों से कहना चाहती हूं कि मुझे उन पर गर्व है। उन्होंने किसी भी टीम के लिए मैच आसान नहीं होने दिया। मिताली ने मैदान पर मौजूद समर्थकों का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि मैं यहां महिला क्रिकेट का समर्थन करने आए सभी प्रशंसकों को धन्यवाद देती हूं। मिताली ने अपने भविष्य और झूलन गोस्वामी के बारे में अपनी राय साझा की।

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