..इस मामले में जेल भी जा चुके हैं नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी, जेल में रहे थे 10 दिन

abhijeet
..इस मामले में जेल भी जा चुके हैं अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाले अभिजीत बनर्जी, जेल में रहे थे 10 दिन

नई दिल्ली। अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाले भारतीय मूल के अभिजीत विनायक बनर्जी जेल भी जा चुके हैं। वह भी तब जब वह जेएनयू के छात्र थे। पढ़ाई के दौरान वह किसी भी छात्र संगठन से नहीं जुड़े थे लेकिन अहम मुद्दों पर अपनी राय जरूर रखते थे। इसी कारण 1983 में जेएनयू में ऐडमिशन पॉलिसी में सुधार के खिलाफ आंदोलन किया था। ऐसे में इन्हें 10 दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा था।

Abhijeet Banerjee Who Won Nobel In Economics Has Also Gone To Jail :

बताया जाता है कि, अभिजीत को अच्छा खाने और नई जगहों को ट्राई करने का हमेशा से शौक था। यही नहीं आज ही की तरह वह उन दिनों भी ड्रिंक भी एंजॉय किया करते थे। 1980 के दशक में जेएनयू के छात्र रहते हुए ही अभिजीत बनर्जी की प्रतिभा सामने आने लगी थी। उस दौरान भी उनके साथियों और प्रफेसर्स को लगता था कि वह कुछ बड़ा जरूर करेंगे। अभिजीत इकनॉमिक्स में जब एमए पूरा किये तो वह अपने बैच् के टॉपर थे।

इसके साथ ही उन्होंने सबसे ज्यादा ग्रेड हासिल कर सेंटर का भी रिकॉर्ड तोड़ा था। जेएनयू में इकनॉमिक्स के भले ही सर्वश्रेष्ठ छात्र न रहे हों, लेकिन बेहतरीन स्टूडेंट्स में से एक थे।स्टूडेंट्स के बीच हमेशा से चर्चित रहे प्रभात पटनायक, कृष्णा भारद्वाज और अमित भादुरी जैसे टीचर्स बताते हैं कि वह कभी क्लासरूम में प्रफेसर्स से चर्चा के दौरान बहस से पीछे नहीं हटते थे।

हालांकि इस सबके बीच उन्होंने हमेशा टीचर्स का सम्मान बरकरार रखा। बतातें हैं कि, कैंपस में रहने के दौरान अभिजीत किसी भी छात्र संगठन से नहीं जुड़े। एसएफआई, एआईएसएफ, फ्री थिंकर्स या फिर समाजवादी युवजन सभा जैसे किसी भी संगठन से उन्होंने दूरी ही बनाए रखी।

नई दिल्ली। अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाले भारतीय मूल के अभिजीत विनायक बनर्जी जेल भी जा चुके हैं। वह भी तब जब वह जेएनयू के छात्र थे। पढ़ाई के दौरान वह किसी भी छात्र संगठन से नहीं जुड़े थे लेकिन अहम मुद्दों पर अपनी राय जरूर रखते थे। इसी कारण 1983 में जेएनयू में ऐडमिशन पॉलिसी में सुधार के खिलाफ आंदोलन किया था। ऐसे में इन्हें 10 दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा था। बताया जाता है कि, अभिजीत को अच्छा खाने और नई जगहों को ट्राई करने का हमेशा से शौक था। यही नहीं आज ही की तरह वह उन दिनों भी ड्रिंक भी एंजॉय किया करते थे। 1980 के दशक में जेएनयू के छात्र रहते हुए ही अभिजीत बनर्जी की प्रतिभा सामने आने लगी थी। उस दौरान भी उनके साथियों और प्रफेसर्स को लगता था कि वह कुछ बड़ा जरूर करेंगे। अभिजीत इकनॉमिक्स में जब एमए पूरा किये तो वह अपने बैच् के टॉपर थे। इसके साथ ही उन्होंने सबसे ज्यादा ग्रेड हासिल कर सेंटर का भी रिकॉर्ड तोड़ा था। जेएनयू में इकनॉमिक्स के भले ही सर्वश्रेष्ठ छात्र न रहे हों, लेकिन बेहतरीन स्टूडेंट्स में से एक थे।स्टूडेंट्स के बीच हमेशा से चर्चित रहे प्रभात पटनायक, कृष्णा भारद्वाज और अमित भादुरी जैसे टीचर्स बताते हैं कि वह कभी क्लासरूम में प्रफेसर्स से चर्चा के दौरान बहस से पीछे नहीं हटते थे। हालांकि इस सबके बीच उन्होंने हमेशा टीचर्स का सम्मान बरकरार रखा। बतातें हैं कि, कैंपस में रहने के दौरान अभिजीत किसी भी छात्र संगठन से नहीं जुड़े। एसएफआई, एआईएसएफ, फ्री थिंकर्स या फिर समाजवादी युवजन सभा जैसे किसी भी संगठन से उन्होंने दूरी ही बनाए रखी।