काश! मैं भी गोरा होता तो इतनी तकलीफ न होती: अभिनव मुकुन्द

नई दिल्ली। नस्लवाद मानव जाति के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक है। माना जाता है कि खेल एक ऐसी अवधारणा है, जहां नस्लवाद प्रवेश नहीं कर सकता लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा कई बार देखा गया, जब खिलाड़ी इसके शिकार बन गए। इस क्षेत्र में भी नस्लवाद तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि खिलाड़ियों द्वारा इसकी लगातार निंदा भी जारी है। सोशल मीडिया पर भारतीय टीम में ओपनर के तौर पर शामिल हुए अभिनव मुकुन्द ने खुला खत जारी किया है जिसमे मुकुंद ने अपने साथ होने वाली नस्लभेदी टिप्पणी के बारे में बताया है।

अभिनव ने खत में लिखा है कि मुझे कई नामों से बुलाया जाता रहा है, मैं इन बातों को हंसकर नज़रअंदाज़ कर देता हूं, मैं ये बचपन से झेल रहा हूं और इन बातों ने मुझे मज़बूत बनाया है। मैं ऐसी बातों का जवाब नहीं देता पर आज मैं उन तमाम लोगों की तरफ़ से बोल रहा हूं जो रंगभेद शिकार हुए हैं। मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि सिर्फ़ गोरा ही सुंदर रंग नहीं होता।”

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समर्थन में उतरे कई सितारे
मुकुंद के इस ट्वीट के समर्थन में फौरन ही आर अश्विन जैसे क्रिकेटर सामने आ गए। उन्होंने भी मुकुंद के पत्र की कॉपी ट्वीट कर उससे सीखने की सलाह दे डाली। 7 टेस्ट मैचों में दो अर्द्धशतकीय पारियां खेलने वाले बांए हाथ के इस सलामी बल्लेबाज़ ने भी साफ़ कर दिया कि उनका ये पत्र टीम इंडिया में किसी सदस्य के ख़िलाफ़ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। अभिनव सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने वाले पहले खिलाड़ी नहीं हैं, पर 122 फर्स्ट क्लास मैचों में 48 के औसत से साढ़े आठ हज़ार से ज़्यादा रन बनाने वाले अभिनव ने जो मुद्दा उठाया है वह बेहद संजीदा है और उम्मीद की जा सकती है कि खेल प्रेमी इस पर जरूर गौर फरमाएंगे।

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