ये कैसी सफलता: पौने 11 हजार करोड़ कालाधन लाने में खर्च कर दिए सवा दो लाख करोड़

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ये कैसी सफलता: पौने 11 हजार करोड़ कालाधन लाने में खर्च कर दिए सवा दो लाख करोड़

According To Rbi Report For Recovery Of Rs 11 720 Crore Blackmoney Recovery Government Spent 2 25 Lacs Crore

​नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंको के पास वापस आ गया है। रिजर्व बैंक ने अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 10.720 करोड़ रूपए की करेंसी ही बैंकों में वापस नही आया है। जिसके बारे में कहा गया कि ये कालाधन है, जो बैंकों में जमा नही किया गया है।

बता दें कि सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि इसके पीछे मुख्य मकसद कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। सरकार ने नोटबंदी की घोषणा के बाद लोगों को पुराने नोटों को जमा कराने के लिए 50 दिन की सीमित अवधि उपलब्ध कराई थी। नोटबंदी के समय मूल्य के हिसाब से 500 और 1,000 रुपये के 15.41 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे। रिजर्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक 15.31 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकों के पास वापस आ चुके हैं। इसका मतलब है कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं।

ये रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक ने कहा कि निर्दिष्ट बैंक नोटों (एसबीएन) की गिनती का जटिल कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। नोटबंदी के बाद लोगों को पुराने नोट जमा कराने का समय दिया गया था। कुछ ऐसे मामले जिनमें बहुत अधिक पुराने नोट जमा कराए गए, जो अब आयकर विभाग की जांच के घेरे में हैं। रिजर्व बैंक के मुताबिक गिनती करने के बाद नोटों को नष्ट कर दिया गया।

बता दें कि नोटबंदी के बाद 2016-17 में रिजर्व बैंक ने 500 और 2,000 रुपये के नए नोट तथा अन्य मूल्य के नोटों की छपाई पर 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए, जो इससे पिछले साल खर्च की गई 3,421 करोड़ रुपये की राशि के दोगुने से भी अधिक है। 2017-18 (जुलाई 2017 से जून 2018) के दौरान केंद्रीय बैंक ने नोटों की छपाई पर 4,912 करोड़ रुपये और खर्च किए।

फिलहाल इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के इस तुगलकी फरमान के बाद इकॉनमी को एक ही साल में 2.25 लाख करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। पार्टी ने कहा कि पीएम मोदी इसके लिए माफी मांगे। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि नोटवंदी के तीन मकसद थे,आतंकवाद पर चोट,नकली नोटों पर लगाम, और कालेधन की वापसी। इनमें से किसी भी मुदृदे पर सरकार सफल नही हो सकी है। उल्टा कतारों में लगे सौ से ज्यादा लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक मोदी सरकार ने पौने 11 हजार करोड़ कालाधन लाने में सवा दो लाख करोड़ खर्च कर दिए हैं, फिर भी वो इसे अपनी सफलता कह रही है।

 

​नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंको के पास वापस आ गया है। रिजर्व बैंक ने अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 10.720 करोड़ रूपए की करेंसी ही बैंकों में वापस नही आया है। जिसके बारे में कहा गया कि ये कालाधन है, जो बैंकों में जमा नही किया गया…