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बिहार में ‘चमकी’ की चपेट में सैकड़ों मासूम, जानिए क्या होते हैं लक्षण

Acute Encephalitis Syndrome Aes

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES बीमारी की चपेट में आने से इस साल 54 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी को चमकी बुखार भी कहा जाता है। इस साल जनवरी से अब तक कुल 179 संदिग्ध AES के मामले सामने आ चुके हैं। सिर्फ 10 जून के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल(एसकेएमसीएच) में 44 बच्चे भर्ती किए गए। जिनमें से 25 बच्चों की मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक इस बुखार से पीड़ित और मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच की है।

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क्या होते हैं लक्षण

  • शुरुआत तेज बुखार से होती है।
  • फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है।
  • इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है।
  • मानसिक भटकाव महसूस होता है।
  • बच्चा बेहोश हो जाता है।
  • दौरे पड़ने लगते हैं।
  • घबराहट महसूस होती है।
  • कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।
  • अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है।
  • आमतौर पर यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है।

ये हैं मौत के आंकड़े

  • साल 2012 में सबसे ज्यादा 120 मौतें हुई।
  • साल 2013 में 39
  • साल 2014 में 90
  • साल 2015 में 11
  • 2016 में 4 मौतें
  • साल 2017 में 11
  • साल 2018 में 7 बच्चों की जान गई थी।

क्या कहते हैं डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो अब तक हुई मौतों में से 80 फीसदी मौतों में हाइपोग्लाइसीमिया का शक है। शाम का खाना न खाने से रात को हाइपोग्लाइसीमिया या लो-ब्लड शुगर की समस्या हो जाती है, खासकर उन बच्चों के साथ जिनके लिवर और मसल्स में ग्लाइकोजन-ग्लूकोज की स्टोरेज बहुत कम होती है। इससे फैटी ऐसिड्स जो शरीर में एनर्जी पैदा करते हैं और ग्लूकोज बनाते हैं, का ऑक्सीकरण हो जाता है।

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