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अडानी ग्रुप को झटका, विदेशी कंपनी को मिला जेवर हवाईअड्डे का ठेका

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) के लिए बिडिंग प्रोसेस में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी (Zurich Airport International AG) को सफलता मिली है।

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इस हवाई अड्डे को बनाने के लिए चार कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिसमें अडानी समूह, एनकोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) शामिल थे। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने प्रति यात्रा 400.97 रुपये, DIAL (दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) ने 351 रुपये, अडानी इंटरप्राइजेज ने 360 रुपये और एनकोरेज ने 205 रुपये की बोली लगाई थी।  

29,560 करोड़ की आएगी लागत

जेवर हवाई अड्डे का नाम नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। इस प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जब हवाई अड्डा पूरी तरह बन जाएगा तो यह 5,000 हेक्टेयर में फैला रहेगा। इसे बनाने में 29,560 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

जेवर हवाई अड्डे को पांच हजार हेक्टेयर में बनाया जाना है। पूरी तरह बन जाने के बाद यह भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने 84 फीसदी से अधिक जमीन अधिग्रहण कर यमुना अथॉरिटी को कब्जा भी दिला दिया है।

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अधिग्रहीत की गई जमीन पर जल्द ही पिलर लगाने का काम शुरू किया जाएगा। एयरपोर्ट के पहले चरण के तहत 1239 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। 1239 हेक्टेयर भूमि में से 77 फीसदी यानी करीब 950 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा वितरण हो चुका है।प्रशासन प्रतिकर लेने वाले किसानों की भूमि पर कब्जा ले रहा है।

इस पर छह से आठ रनवे होंगे जो भारत में स्थित सभी हवाई अड्डों में सबसे ज्यादा होंगे। हवाई अड्डे का पहला चरण 1,334 हेक्टेयर में फैला होगा और इस पर 4,588 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अधिकारियों ने बताया कि पहला चरण 2023 में पूरा होने की उम्मीद है।

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