आडाणी ग्रुप को मिला 45000 करोड़ का पनडुब्बी बनाने का ठेका, नौसेना व रक्षा मंत्रालय आमने-सामने

pm modi
आडाणी ग्रुप को मिला 45000 करोड़ का पनडुब्बी बनाने का ठेका, नौसेना व रक्षा मंत्रालय आमने-सामने

नई दिल्ली। आडाणी ग्रुप को पनडुब्बी बनाने का ठेका देने का मामला एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले दरवाजे से एंट्री करा रहे है। कांग्रेस का कहना है कि अडाणी ग्रुप को भले यह प्रोजेक्ट मिला है, लेकिन उसे इसका अनुभव नहीं है।

Adani Group Wins 45000 Crore Submarine Contract Navy And Ministry Of Defense Face To Face :

वहीं, आडणी ग्रुप को पनडुब्बी ठेका देने को लेकर नौसेना व रक्षा मंत्रालय आमने-सामने आ गए हैं। 45000 करोड़ के इस ठेके में 75-आई प्रोजेक्ट के लिए अडाणी डिफेंस व हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) की तरफ से आवेदन किया गया था।

इसे नौसेना ने रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के ज्वाइंट वेंचर्स को मौका देना चाहिए। यह प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया के तहत बड़ा है। एक न्यूज पेपर में छपी खबर के मुताबिक, इस प्रोजक्ट के तहत 5 आवेदन आए थे। इसमें नौसेना की एंपावर्ड कमेटी ने दो को चुना। इसमें मझगांव डॉक शिपबिलडर्स लिमिटेड और लारसन एंड ट्रूबो शामिल है।

दोनों को सबमरीन के बारे में काफी अनुभव है। वहीं, एंपावर्ड कमेटी के सुझाव को दरकिनार करते हुए सरकार आडणी जेवी को 75 आई प्रोजेक्ट के सौदे के लिए चुन रही है। दोनों के बीच विवाद की यही वजह बताई जा रही है। डिपार्टमेंट आफ डिफेंस प्रोडक्शन ने सुझाव दिया है कि एचएसएल-आडणी वेंचर को भी शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के अधीन है।

वहीं सरकार के इस प्रोजक्ट के लिए अडाणी जेवी को चुनने पर कांग्रेस जमकर हमलवार है। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरेजवाला ने कहा है कि सरकार अपने दोस्तों को पिछे दरवाजे से मदद कर रही है। अडाणी ग्रुप को भले यह प्रोजेक्ट मिला है, लेकिन उसे इसका अनुभव नहीं है।

नई दिल्ली। आडाणी ग्रुप को पनडुब्बी बनाने का ठेका देने का मामला एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले दरवाजे से एंट्री करा रहे है। कांग्रेस का कहना है कि अडाणी ग्रुप को भले यह प्रोजेक्ट मिला है, लेकिन उसे इसका अनुभव नहीं है। वहीं, आडणी ग्रुप को पनडुब्बी ठेका देने को लेकर नौसेना व रक्षा मंत्रालय आमने-सामने आ गए हैं। 45000 करोड़ के इस ठेके में 75-आई प्रोजेक्ट के लिए अडाणी डिफेंस व हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) की तरफ से आवेदन किया गया था। इसे नौसेना ने रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के ज्वाइंट वेंचर्स को मौका देना चाहिए। यह प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया के तहत बड़ा है। एक न्यूज पेपर में छपी खबर के मुताबिक, इस प्रोजक्ट के तहत 5 आवेदन आए थे। इसमें नौसेना की एंपावर्ड कमेटी ने दो को चुना। इसमें मझगांव डॉक शिपबिलडर्स लिमिटेड और लारसन एंड ट्रूबो शामिल है। दोनों को सबमरीन के बारे में काफी अनुभव है। वहीं, एंपावर्ड कमेटी के सुझाव को दरकिनार करते हुए सरकार आडणी जेवी को 75 आई प्रोजेक्ट के सौदे के लिए चुन रही है। दोनों के बीच विवाद की यही वजह बताई जा रही है। डिपार्टमेंट आफ डिफेंस प्रोडक्शन ने सुझाव दिया है कि एचएसएल-आडणी वेंचर को भी शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के अधीन है। वहीं सरकार के इस प्रोजक्ट के लिए अडाणी जेवी को चुनने पर कांग्रेस जमकर हमलवार है। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरेजवाला ने कहा है कि सरकार अपने दोस्तों को पिछे दरवाजे से मदद कर रही है। अडाणी ग्रुप को भले यह प्रोजेक्ट मिला है, लेकिन उसे इसका अनुभव नहीं है।