आदित्य ने वर्ली से किया नामांकन, पहली बार चुनाव मैदान में उतरा ठाकरे परिवार

Aditya Thackeray
आदित्य ने वर्ली से किया नामांकन, पहली बार चुनाव मैदान में उतरा ठाकरे परिवार

मुंबई। अपने 53 साल के इतिहास में शिवसेना के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है । गुरुवार को शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन से पहले आदित्य ने रोड शो के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान शिवसेना के कार्यकर्ता पूरे जोश में नजर आए। जगह-जगह फूल बरसाकर उनका स्वागत किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुबह फोन करके आदित्य को आशीर्वाद दिया।

Aditya Filed Nomination From Worli Thackeray Family For The First Time :

पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आदित्य को समर्थन देने के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करना हमारे परिवार की परंपरा रही है। नई पीढ़ी, नई सोच के साथ आई है और मैं जनता के समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं मैं वचन देता हूं कि जनता जब भी बुलाएगी तब आदित्य हाजिर होंगे।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष और आदित्य ठाकरे के चाचा राज ठाकरे ने अपने भतीजे के खिलाफ वर्ली से कोई भी प्रत्याशी न उतारने का फैसला लिया है। मनसे सूत्रों के अनुसार, आदित्य ठाकरे ने चुनाव मैदान में उतरने से पहले राज ठाकरे का आशीर्वाद लिया है। इसलिए भतीजे आदित्य ठाकरे के लिए चाचा राज ठाकरे वर्ली सीट छोड़ सकते हैं। वर्ली विधानसभा सीट पर मनसे का अच्छा जनाधार है। 2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे को 32000 वोट मिले थे। हालांकि 2014 में यह गिरकर 8000 से कुछ ज्यादा रह गया था।

 वर्ली में 1990 से शिवसेना का राज

वर्ली विधानसभा सीट पर शिवसेना के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1990 से 2014 के बीच छह विधानसभा चुनावों में से सिर्फ एक बार ही एनसीपी ने यहां जीत दर्ज की है। इसके अलावा हर बार यहां शिवसेना ने ही जीत दर्ज की है। 1990 से 2004 तक तो दत्ताजी नालावड़े ने यहां लगातार जीत हासिल की थी। राकांपा नेता सचिन अहीर को शिवसेना में शामिल करना इसी योजना का हिस्सा था। सचिन वर्ली (मुंबई) से विधायक रहे थे।

53 साल में पहली बार चुनाव में उतरा ठाकरे परिवार

दिवंगत बाल ठाकरे ने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी। तब से ठाकरे परिवार के किसी भी सदस्य ने चुनावों में हिस्सा नहीं लिया है और न ही कोई संवैधानिक पद स्वीकार किया है। 2014 में बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने जरूर चुनाव लड़ने का मन बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने फैसला बदल लिया था। लेकिन अब करीब 53 साल बाद उद्धव ठाकरे के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे ने विधानसभा चुनाव में उतरने का मन बनाया है।

 

मुंबई। अपने 53 साल के इतिहास में शिवसेना के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है । गुरुवार को शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन से पहले आदित्य ने रोड शो के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान शिवसेना के कार्यकर्ता पूरे जोश में नजर आए। जगह-जगह फूल बरसाकर उनका स्वागत किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुबह फोन करके आदित्य को आशीर्वाद दिया। पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आदित्य को समर्थन देने के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करना हमारे परिवार की परंपरा रही है। नई पीढ़ी, नई सोच के साथ आई है और मैं जनता के समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं मैं वचन देता हूं कि जनता जब भी बुलाएगी तब आदित्य हाजिर होंगे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष और आदित्य ठाकरे के चाचा राज ठाकरे ने अपने भतीजे के खिलाफ वर्ली से कोई भी प्रत्याशी न उतारने का फैसला लिया है। मनसे सूत्रों के अनुसार, आदित्य ठाकरे ने चुनाव मैदान में उतरने से पहले राज ठाकरे का आशीर्वाद लिया है। इसलिए भतीजे आदित्य ठाकरे के लिए चाचा राज ठाकरे वर्ली सीट छोड़ सकते हैं। वर्ली विधानसभा सीट पर मनसे का अच्छा जनाधार है। 2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे को 32000 वोट मिले थे। हालांकि 2014 में यह गिरकर 8000 से कुछ ज्यादा रह गया था।

 वर्ली में 1990 से शिवसेना का राज

वर्ली विधानसभा सीट पर शिवसेना के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1990 से 2014 के बीच छह विधानसभा चुनावों में से सिर्फ एक बार ही एनसीपी ने यहां जीत दर्ज की है। इसके अलावा हर बार यहां शिवसेना ने ही जीत दर्ज की है। 1990 से 2004 तक तो दत्ताजी नालावड़े ने यहां लगातार जीत हासिल की थी। राकांपा नेता सचिन अहीर को शिवसेना में शामिल करना इसी योजना का हिस्सा था। सचिन वर्ली (मुंबई) से विधायक रहे थे।

53 साल में पहली बार चुनाव में उतरा ठाकरे परिवार

दिवंगत बाल ठाकरे ने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी। तब से ठाकरे परिवार के किसी भी सदस्य ने चुनावों में हिस्सा नहीं लिया है और न ही कोई संवैधानिक पद स्वीकार किया है। 2014 में बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने जरूर चुनाव लड़ने का मन बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने फैसला बदल लिया था। लेकिन अब करीब 53 साल बाद उद्धव ठाकरे के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे ने विधानसभा चुनाव में उतरने का मन बनाया है।